जीएसटी परिषद की बैठक: नए 18 प्रतिशत जीएसटी स्लैब के साथ सस्ती होंगी छोटी एवं लग्जरी कारें,350 सीसी तक की बाइके और 3 व्हीलर भी होंगे सस्ते
22 सितंबर, 2025 से लागू होने वाला यह त्योहारी तोहफा एंट्री लेवल गाड़ियों को और भी किफ़ायती बना देगा
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यदि आप अब कोई नई कार या बाइक लेने की तैयारी कर रहे हैं तो वो आपको काफी किफायती दामों पर उपलब्ध होगी। जीएसटी परिषद ने छोटी कारों, 350 सीसी तक की बाइक और तिपहिया वाहनों पर टैक्स 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। , जबकि लग्ज़री कारें और बड़ी बाइक 40 प्रतिशत के नए स्लैब में आ गई हैं, लेकिन फिर भी उन पर कम टैक्स लगेगा। वो कैसे? और जानने के लिए इस आर्टिकल को अंत तक पढ़ें!
छोटी कारों,बाइकों और 3 व्हीलर्स पर लगेगा कम टैक्स
जीएसटी में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए, सरकार ने ऑटोमोबाइल पर जीएसटी दरों में संशोधन किया है। इससे त्योहारों के मौसम में एंट्री-लेवल हैचबैक, कम्यूटर बाइक और ऑटोरिक्शा ग्राहकों को और भी सस्ते दामों पर मिलेंगे।
नई परिभाषा के अनुसार, छोटी कारें 1200 सीसी तक की क्षमता वाली पेट्रोल कारें या 1500 सीसी तक की डीजल कारें हैं जिनकी अधिकतम लंबाई 4000 मिलीमीटर है। ये सभी 18 प्रतिशत जीएसटी की श्रेणी में आती हैं।
संक्षेप में, ये वे वाहन हैं जो 18 प्रतिशत जीएसटी स्लैब के अंतर्गत आते हैं:
- मारुति डिजायर, किआ सिरोस आदि जैसी 1200 सीसी तक पेट्रोल इंजन, 1500 सीसी तक डीजल इंजन, तथा 4000 मिलीमीटर से कम लंबाई वाली छोटी कारें।

- रॉयल एनफील्ड बुलेट और रॉयल एनफील्ड क्लासिक 350 जैसी 350 सीसी तक की मोटरसाइकिलें।

- 3 व्हीलर
- ब्रेज़ा एस-सीएनजी, नेक्सन सीएनजी आदि जैसी 1200 सीसी तक पेट्रोल/एलपीजी/सीएनजी या 1500 सीसी तक डीजल, 4000 सीसी से कम जैसी हाइब्रिड कारें।
हालांकि, इन सीमाओं से ऊपर हाइब्रिड डीजल और पेट्रोल हाइब्रिड (जैसे मारुति ग्रैंड विटारा, टोयोटा इनोवा हाइक्रॉस, और अपकमिंग मारुति विक्टोरिस) 40 प्रतिशत की उच्चतर श्रेणी में आती हैं।
कौनसे व्हीकल्स को रखा गया है 40 प्रतिश्त के स्लैब में?
जीएसटी काउंसिल ने लग्जरी और अहितकर वस्तुओं के लिए 40 प्रतिशत का नया स्लैब पेश किया है।
इसमें निम्न चीजें शामिल हैं:
- केटीएम ड्यूक 390,ट्रायंफ स्पीड 400 आदि जैसी 350 सीसी से ज़्यादा इंजन वाली मोटरसाइकिलें।

- हुंडई क्रेटा,किआ सेल्टोस आदि जैसी बड़ी और मीडियम साइज की कारें, यानी पेट्रोल में 1200 सीसी से अधिक और डीजल में 1500 सीसी से अधिक, जिनकी लंबाई 4000 मिलीमीटर से अधिक हो।

- मारुति ग्रैंड विटारा, होंडा सिटी ई:एचईवी, और अपकमिंग मारुति विक्टोरिस सीएनजी जैसी हाइब्रिड, 4000 मिलीमीटर से ज्यादा लंबी पेट्रोल/एलपीजी/सीएनजी और 1200 सीसी इंजन वाली कारें।

- विमान, नौकाएँ और मनोरंजन के उद्देश्य से लिए जाने वाले अन्य रीक्रिएशनल व्हीकल्स।
सिर्फ़ मास मार्केट कारें ही सस्ती नहीं होंगी। 4 मीटर से ज़्यादा लंबी और/या 1500 सीसी से ज़्यादा इंजन क्षमता वाली कारें भी सस्ती हो जाएंगी। हुंडई क्रेटा, किआ सेल्टोस, टाटा हैरियर, महिंद्रा एक्सयूवी700, महिंद्रा स्कॉर्पियो एन जैसी कारों को इसका फ़ायदा मिलने वाला है।
पहले, इन वाहनों पर 22 प्रतिशत कॉम्पेनसेशन सेस सहित 50 प्रतिशत टैक्स लगता था। जीएसटी सुधारों ने सेस कंपोनेंट को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है, और अब इन कारों पर एकसमान 40 प्रतिशत की दर से टैक्स लगेगा।
कमर्शियल व्हीकल्स और पार्ट्स पर भी लगेगा अब एकसमान टैक्स
जीएसटी काउंसिल ने कमर्शियल बिजनेस में टैक्स को और भी सरल बना दिया है:
बसों, ट्रकों और एम्बुलेंसों पर अब एकसमान 18 प्रतिशत (पहले 28%) टैक्स कर दिया है।
एचएस कोड क्लासिफिकेशन की परवाह किए बिना, ऑटो पार्ट्स पर अब एक ही 18 प्रतिशत टैक्स कर दिया गया है।
इस कदम से मैन्यूफैक्चरर्स और पार्ट्स सप्लायर्स की उलझन कम होने तथा सप्लाय चेन आसान होने की संभावना है।
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर जारी रहेगा 5 प्रतिशत टैक्स
दिलचस्प बात यह है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं आया है। सभी इलेक्ट्रिक व्हीकल, इलेक्ट्रिक 2 व्हीलर और इलेक्ट्रिक 3 व्हीलर 5 प्रतिशत की रियायती जीएसटी दर का लाभ उठाते रहेंगे, जिससे वे सबसे कम टैक्स वाले व्हीकल ऑप्शन बने रहेंगे।

हालांकि यह सीमा अभी भी 5 प्रतिशत पर बनी हुई है, लेकिन लग्जरी ईवी के बारे में कोई स्पष्टता नहीं है, न ही कोई मूल्य सीमा निर्धारित की गई है।
इंडस्ट्री और ग्राहकों के लिए इसके है क्या मायने?
छोटी कारों और कम्यूटर बाइक्स पर जीएसटी 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करना 10 प्रतिशत की कटौती है, और इसका मतलब है कि अब ग्राहकों के लिए ये एक तरह से भारी बचत मानी जा सकती है। उदाहरण के लिए, 6 लाख रुपये (एक्स-फैक्ट्री) की कीमत वाली एक हैचबैक अब जीएसटी कटौती के बाद 60,000 रुपये तक सस्ती हो सकती है।

सुस्त बिक्री से जूझ रहे ऑटोमोबाइल सेक्टर को अब आगामी त्योहारी सीजन के दौरान एक ज़बरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है। स्थानीय स्तर पर बनी कारों और दोपहिया वाहनों की मांग में तेज़ी आने की संभावना है, जबकि लग्ज़री और प्रीमियम कारें भी कम अंतर से ही सही, सस्ती हो रही हैं।
कब से होगा बदलाव?
जीएसटी दरों में सभी बदलाव त्योहारी सीज़न से कुछ हफ़्ते पहले, 22 सितंबर, 2025 से प्रभावी होंगे।
कुल मिलाकर, अगर आप नया वाहन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो चीज़ें बेहतर दिख रही हैं और आपको नई जीएसटी व्यवस्था लागू होने तक इंतज़ार ज़रूर करना चाहिए। इससे त्योहारों का मौसम हमारी जेब पर ज़्यादा बोझ नहीं डालेगा और हमारे परिवार के लिए भी खुशियां लाएगा।
नए जीएसटी स्लैब के बारे में आपकी क्या राय है? हमें कमेंट में बताएं!