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    बड़ी संख्या में भारतीय क्यों अपना रहे हैं इलेक्ट्रिक व्हीकल्स? जानिए क्यों इन पर विचार करना है फायदेमंद

    अब बात सिर्फ़ पर्यावरण को बचाने की नहीं है; अब यह आर्थिक रूप से भी फ़ायदेमंद साबित हो रहा है।

    भानु
    भानु
    Published On जुलाई 23, 2026 17:10 ist
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    published onJul 23, 2026 17:10 IST
    last updated onJul 23, 2026 17:10 IST
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    Why Switch to EVs?

    भारत में इलेक्ट्रिक कार खरीदना अब सिर्फ पर्यावरण की चिंता करने वाले या अमीर लोगों का शौक नहीं रह गया है। कम होती रनिंग कॉस्ट, बेहतर होता चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और दमदार परफॉर्मेंस के साथ, ईवी अब एक प्रैक्टिकल और आर्थिक रूप से फायदेमंद विकल्प बनकर उभरी हैं, जिसे परिवार अपनी प्राइमरी कार के तौर पर भी देख रहे हैं। महिंद्रा जैसे बड़े ब्रांड्स अपनी आने वाली बीई और एक्सईवी सीरीज के साथ इस बदलाव को और तेज करने के लिए तैयार हैं, जो दिखाते हैं कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अब भारत में मुख्यधारा का हिस्सा बन रही है।

    कितनी है बचत? रनिंग कॉस्ट का पूरा गणित

    एक इलेक्ट्रिक कार खरीदने का सबसे बड़ा आकर्षण उसकी बेहद कम रनिंग कॉस्ट है। अगर आप घर पर अपनी ईवी चार्ज करते हैं, तो खर्च पेट्रोल कार के मुकाबले बहुत कम आता है। उदाहरण के लिए, एक मिड-साइज इलेक्ट्रिक एसयूवी जिसमें 59-79 केडब्ल्यूएच का बैटरी पैक हो, उसे घर पर चार्ज करने पर प्रति किलोमीटर का खर्च करीब 1.5 से भी कम पड़ता है। वहीं, इसी साइज की एक पेट्रोल एसयूवी चलाने का खर्च आज के पेट्रोल की कीमतों पर 6 से 8 प्रति किलोमीटर तक आता है।

    यह सच है कि पब्लिक फास्ट चार्जर्स पर चार्जिंग महंगी होती है, लेकिन लंबी दूरी की यात्राओं पर भी यह खर्च पेट्रोल से कम ही रहता है। रोजाना शहर में चलने वालों के लिए, जो रात में घर पर गाड़ी चार्ज कर सकते हैं, यह बचत बहुत बड़ी हो जाती है। साल भर में हजारों किलोमीटर चलने पर आप पेट्रोल पर खर्च होने वाले हजारों रुपये बचा सकते हैं।

    चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: अब पहले से बेहतर, पर मंजिल अभी दूर

    कुछ साल पहले तक चार्जिंग स्टेशन ढूंढना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। पिछले तीन सालों में पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या लगभग छह गुना बढ़ गई है। 2022 में जहां लगभग 5,000 पब्लिक चार्जर थे, वहीं 2026 की शुरुआत तक यह आंकड़ा 28,000 को पार कर चुका है। कर्नाटक, महाराष्ट्र, दिल्ली और तमिलनाडु जैसे राज्य इस मामले में सबसे आगे हैं।

    Mahindra BE 6

    मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख हाईवे पर अब आपको थोड़ी-थोड़ी दूरी पर कई फास्ट चार्जिंग स्टेशन मिल जाएंगे, जिससे लंबी दूरी की यात्राएं आसान हो गई हैं। हालांकि, हमें यह भी मानना होगा कि भारत में चार्जर-टू-ईवी का अनुपात अभी भी लगभग 1:235 है, जो कि 1:6 से 1:20 के वैश्विक मानकों से काफी पीछे है। कई बार लिस्टेड चार्जर काम नहीं करते या उन पर लंबी कतारें होती हैं। इसलिए, आज भी ज्यादातर ईवी मालिकों के लिए घर पर ओवरनाइट चार्जिंग ही सबसे सुविधाजनक और भरोसेमंद तरीका बना हुआ है।

    मेंटेनेंस का खर्च: कहीं फायदा, कहीं नुकसान

    इलेक्ट्रिक कारों में मूविंग पार्ट्स बहुत कम होते हैं। इसमें इंजन, गियरबॉक्स, एग्जॉस्ट सिस्टम, टाइमिंग बेल्ट या इंजन ऑयल जैसी चीजें नहीं होतीं, जिससे रेगुलर सर्विसिंग का खर्च काफी कम हो जाता है। इसके अलावा, रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम की वजह से ब्रेक पैड भी पेट्रोल कारों के मुकाबले ज्यादा चलते हैं।

    Mahindra XEV 9E Headlamp

    लेकिन इसके कुछ दूसरे पहलू भी हैं। ईवी का इंश्योरेंस प्रीमियम आमतौर पर पेट्रोल कार से ज्यादा होता है, क्योंकि इनकी कीमत ज्यादा होती है और बैटरी रिप्लेसमेंट का रिस्क कवर होता है। बैटरी के अतिरिक्त वजन के कारण ईवी के टायर भी जल्दी घिसते हैं। एक सामान्य पेट्रोल कार के टायर जहां 45,000-50,000 किलोमीटर तक चल जाते हैं, वहीं एक ईवी के टायर 35,000-40,000 किलोमीटर में ही बदलने पड़ सकते हैं।

    Mahindra XEV 9S Side

    सिर्फ पैसे की नहीं, पर्यावरण की भी बचत

    ईवी का एक बड़ा फायदा उनका ज़ीरो टेलपाइप एमिशन है। यानी ये चलते समय कोई धुआं नहीं छोड़तीं, जिससे शहरों में एयर क्वालिटी सुधारने में सीधी मदद मिलती है। हालांकि यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि ये ज़ीरो-पॉल्यूशन हैं, क्योंकि बैटरी बनाने और गाड़ी को चार्ज करने के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली के उत्पादन में कार्बन फुटप्रिंट होता है। फिर भी, यह पेट्रोल-डीजल कारों से निकलने वाले सीधे धुएं से कहीं बेहतर है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक मोटर लगभग शांत होती है, जिससे शोर का प्रदूषण भी कम होता है और आपको एक शांत और आरामदायक ड्राइव मिलती है।

    Mahindra XEV 9S Infotainment

    क्या आपकी कार फ्यूचर-प्रूफ है?

    टेक्नोलॉजी के मामले में इलेक्ट्रिक कारें पेट्रोल कारों से मीलों आगे हैं। कंपनियां अब लंबी बैटरी वारंटी दे रही हैं, जिससे ग्राहकों का भरोसा बढ़ रहा है। उदाहरण के तौर पर, महिंद्रा अपनी बीई6 और एक्सईवी 9ई जैसी कारों में पहले ओनर्स के लिए लाइफटाइम बैटरी वारंटी देने की बात कर रही है। यह बैटरी की लंबी उम्र को लेकर ग्राहकों की सबसे बड़ी चिंता को दूर करता है।

    Mahindra BE 6 Rear Quarter

    इसके अलावा, ओवर-द-एयर (ओटीए) अपडेट्स के जरिए कंपनियां आपकी कार के सॉफ्टवेयर को लगातार अपडेट करती रहती हैं। इससे आपकी गाड़ी समय के साथ पुरानी नहीं होती, बल्कि उसमें नए फीचर्स और बेहतर परफॉर्मेंस जुड़ते रहते हैं, ठीक आपके स्मार्टफोन की तरह।

    बजट का खेल: 20-25 लाख रुपये में मिलता है असली अपग्रेड

    भारत में ईवी मार्केट में बजट एक बहुत बड़ा फैक्टर है। 15-18 लाख रुपये की रेंज में आपको अच्छी एंट्री-लेवल ईवी मिल जाती हैं, लेकिन अगर आप अपना बजट 20-25 लाख रुपये या उससे ऊपर ले जाते हैं, तो आपको रेंज, स्पेस, फीचर्स और टेक्नोलॉजी में एक बड़ा अपग्रेड मिलता है।

    Mahindra XEV 9E Front Quarter

    महिंद्रा के लाइनअप में मौजूद बीई6 और एक्सईवी 9ई जैसी गाड़ियां इसका बेहतरीन उदाहरण हैं। इनमें 79 केडब्ल्यूएच तक के बड़े बैटरी पैक मिलता है, जो 650 किलोमीटर तक की शानदार रेंज दे सकते हैं। साथ ही, ये गाड़ियां फास्ट डीसी चार्जिंग को सपोर्ट करती है, जिससे इन्हें सिर्फ 20 मिनट में 20% से 80% तक चार्ज किया जा सकता है। अगर आपको ज्यादा स्पेस चाहिए, तो एक्सईवी एस में एक प्रॉपर 7-सीटर लेआउट मिलेगा, जो इसे बड़े परिवारों के लिए एक प्रैक्टिकल ऑप्शन बनाता है। इस बजट में आपको बेहतर सेफ्टी, बड़ा टचस्क्रीन और एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (एडीएएस) जैसे प्रीमियम फीचर्स भी मिलते हैं।

    कारदेखो ओपिनियन

    तो क्या अब इलेक्ट्रिक कार पर स्विच करना सही है? इसका जवाब है, हां, काफी हद तक। अगर आप शहर में रहते हैं, आपके पास घर पर चार्जिंग की सुविधा है और आपकी रोजाना की रनिंग ज्यादा है, तो एक ईवी आपके लिए पेट्रोल कार के मुकाबले कहीं ज्यादा सस्ती और सुविधाजनक साबित हो सकती है। कम रनिंग और मेंटेनेंस कॉस्ट के साथ बेहतर होता चार्जिंग नेटवर्क इसे एक मजबूत दावेदार बनाता है।

    Mahindra XEV 9S Rear Quarter

    असली फर्क आपके बजट से पड़ता है। अगर आप 20-25 लाख रुपये या उससे ज्यादा खर्च करने को तैयार हैं, तो आपको लंबी रेंज, ज्यादा स्पेस और फ्यूचर-प्रूफ टेक्नोलॉजी वाली एक शानदार गाड़ी मिलती है जो आपकी प्राइमरी कार की हर जरूरत को पूरा कर सकती है। हालांकि, अगर आपकी यात्राएं ज्यादातर उन इलाकों में होती हैं जहां चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर कमजोर है, तो शायद एक हाइब्रिड या पेट्रोल कार अभी भी आपके लिए एक सुरक्षित विकल्प हो सकती है।

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    भानु
    <p><span id="docs-internal-guid-d5dab83e-7fff-0272-69cc-807a7c6a46e9"><span>बनना तो क्रिकेटर चाहता था मगर, 5-साल तक अखबारों,न्यूज चैनल,न्यूज वेबसाइट के लिए फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क वर्क करते हुए आज ऑटोमोबाइल की दुनिया में ढेर सारी कारों और उनके कलर,फीचर्स,इंजन, पार्ट्स के बारे में लिखते हुए कारदेखो के साथ शानदार 2 साल पूरे कर चुका हूं। प्रवृति घुमक्कड़ किस्म की है और पूरा हिंदुस्तान ट्रेन में बैठकर देखने का सपना है। काम के अलावा फ्री टाइम में टेस्ट मैच देखना,क्रिकेट खेलना, गंभीर विषयों के बारे में जानना, सोचना और लिखना,डार्क,आर्ट,कॉमेडी सभी तरह की मूवीज़ देखने का शौक है। फेसबुक,ट्विटर,इंस्टाग्राम सभी जगह हायपर एक्टिव भी हूं। ज्यादातर वहां मीम्स ही शेयर करता हूं गंभीर बातें तो अपने तक ही सीमित है। इसके अलावा कुछ खास नहीं।</span></span></p>और देखें

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