भारत में नई कार के मुकाबले ज्यादा बिक रही हैं पुरानी कार, आखिर क्यों बढ़ा ये ट्रेंड? पढ़िए इस रिपोर्ट में
भारत में पुरानी कार का बाजार नई कार की बिक्री से ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन क्यों? जानेंगे आगे
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जीएसटी में कटौती से नई कार की बिक्री बढ़ी है, वहीं पुरानी कार की मांग में भी मजबूत वृद्धि जारी है।
पहले की तुलना में अब भारत में पहली बार कार खरीद रहे ग्राहक नई गाड़ी खरीदना ही अपना पहला विकल्प नहीं मानता है। अब वे पुरानी कार खरीदने के लिए भी तैयार हैं, क्योंकि उन्हें नई कार की कीमत पर उच्चे सेगमेंट की मनपसंद कार खरीदने में मदद मिल सकती है। इससे खरीदारों के व्यवहार में एक बुनियादी बदलाव आया है, जिससे पुरानी गाड़ी की बिक्री बढ़ी है।
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने इस साल की शुरुआत में प्रकाशित एक रिपोर्ट में वित्तीय वर्ष 2025-26 में पुरानी कार की बिक्री में 8-10 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया, जो नई कार की सेल्स ग्रोथ की तुलना में दोगुनी से भी ज्यादा है। इन पुरानी कार का बाजार मूल्य करीब 4 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जो नई कार की बिक्री मूल्य के करीब है।
| पैरामीटर |
विवरण |
| वित्तीय वर्ष 2025-26 में पुरानी कार बाजार की वृद्धि |
8-10% वृद्धि का अनुमान |
| ग्रोथ कंपेरिजन |
नई कारों की बिक्री की तुलना में दोगुनी से भी अधिक तेजी |
| वित्तीय वर्ष 2025-26 में पुरानी कार की बिक्री |
6 मिलियन यूनिट पार करने की उम्मीद |
| बाजार मूल्य |
लगभग 4 लाख करोड़ रुपये (₹4 ट्रिलियन) |
| पुरानी से नई कार की बिक्री का अनुपात |
पांच साल पहले 1 से नीचे जो अब बढ़कर 1.4 हो गया |
| ड्राइवर |
डिजिटल अपनाने में वृद्धि, बेहतर फाइनेंस विकल्प, मूल्य-सचेत उपभोक्ता |
| बेची गई पुरानी कारों की औसत आयु |
3.7 वर्ष तक घटने की उम्मीद |
| चुनौतियां |
उच्च नवीनीकरण, लॉजिस्टिक, फाइनेंस लागत |
दूसरे शब्दों में कहें तो भारत में सेकंड हैंड कार की बिक्री में तेजी आ रही है, और अगर आप इस त्योहारी सीजन पर अपनी पसंद की सेकंड हैंड गाड़ी लेने की सोच रहे हैं, तो एक बेहतरीन कार खरीदने का इससे बेहतर समय नहीं हो सकता।
रिसर्च फर्म का कहना है कि इस वित्तीय वर्ष में भारत में पुरानी कारों की बिक्री 60 लाख यूनिट को पार करने की संभावना है, जिसका बाजार मूल्य लगभग 4 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जो नई कारों की बिक्री के लगभग बराबर है। यह तेज बदलाव खरीदारों के बीच बढ़ते खुलेपन, मूल्य पर फोकस, खरीदारी में आसान, डिजिटल अपनाने में तेजी, आसान फाइनेंस विकल्प, और सबसे महत्वपूर्ण बात, कई आर्गनाइज्ड कंपनियों द्वारा विश्वसनीय कारों की पेशकश से आया है।
एक सरंचनात्मक बदलाव

पुरानी और नई कार की बिक्री के बीच का अंतर तेजी से बढ़ा है। अब हर नई कार की बिक्री पर लगभग 1.4 पुरानी कार बिक रही है, जो पांच साल पहले एक से भी कम थी। इससे पता चलता है कि अब अधिकांश लोग पुरानी कार खरीदना पसंद कर रहे हैं। 2017 से 2024 के बीच पुरानी कारों की वृद्धि करीब 5 प्रतिशत थी, पिछले साल पुरानी कार की बिक्री में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और वित्तीय वर्ष 2025-26 में इसके और भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
क्रिसिल रेटिंग के वरिष्ठ निदेशक अनुज सेठी बताते हैं कि यह सुधार उपभोक्ताओं के बढ़ते विश्वास और डिजिटल प्लेटफॉर्म अपनाने से हुआ है। सप्लाई साइड मजबूत है, पुरानी कारों की औसत आयु घट रही है और लगभग 3.7 वर्ष तक पहुंचने की उम्मीद है, और तेजी से अपग्रेड के कारण इनकी मांग बढ़ रही है।
बढ़ता विश्वास

पिछले कुछ वर्षों में वास्तव में जो हुआ है वह यह है कि स्पिनी, कार्स24, कारदेखो, महिंद्रा फर्स्ट चॉइस, कारट्रेड, ओएलएक्स ऑटो जैसे कई ऑर्गनाइज्ड प्लेयर ने बाजार में प्रवेश किया है। इन नई कंपनियों ने पुरानी कार खरीदने का तरीका बदल दिया है। इन कंपनियों ने इंस्पेक्शन हब, टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और कस्टमर एक्सपीरियंस में निवेश के लिए धनराशि जुटाई है। ये कंपनियां ग्राहकों को बेहतर वारंटी, उचित मूल्य और पारदर्शी प्रक्रिया का वादा भी करती है, साथ ही खरीदारी की प्रक्रिया को परेशानी मुक्त बनाती हैं।
पहले पुरानी कार खरीदने में विश्वास और ऑथेंटिक जानकारी का अभाव, और मनमानी कीमत जैसी पारंपरिक समस्याएं आती थी, जिन्हें इन कंपनियों ने टेक्नोलॉजी की मदद से काफी हद तक हल कर दिया है।
डिजिटल लहर

हर इंडस्ट्री की तरह, डिजिटल टूल्स पुरानी कार के बाजार के विकास को गति देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। नए जमाने के यूज्ड कार प्लेटफॉर्म अब इंस्पेक्शन, रिफर्बिशमेंट, फाइनेंस, इंश्योरेंस, और घर तक डिलीवरी जैसी 360 डिग्री सेवाएं प्रदान करते हैं। इसके अलावा, खास ऐप तैयार किए गए हैं जो खरीद और बिक्री को न केवल आसान बनाते हैं, बल्कि सभी सत्यापित विवरणों के साथ कारों की लिस्टिंग के साथ अधिक कुशल भी हैं। ये कंपनियां ट्रांसफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी - आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी इस्तेमाल करती हैं।
ऑनलाइन पुरानी कार की कंपनियों में मैन्युफैक्चर-बेक्ड आउटलेट और इनवेंट्री आधारित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का मिश्रण भी है, जो ऑर्गनाइज्ड मार्केट के आधे हिस्से पर कब्जा करते हैं, और कुल पुरानी कार की बिक्री का एक तिहाई हिस्सा रखते हैं।
ग्राहकों के पास नई कारों के एक मजबूत बाजार के साथ पुरानी कार के लिए ब्रांड, सेगमेंट और कीमत के आधार पर ढेरों विकल्प हैं। इससे इंवेंट्री का विस्तार करने में मदद मिलती है, साथ ही आसान व्हीकल फाइनेंस और कम ब्याज दर के साथ खरीदारी की प्रक्रिया को आसान बनाने और भारत में पुरानी कार की ओर रूझान बढ़ने की उम्मीद है।
जीएसटी दर में कटौती का प्रभाव

जीएसटी में कटौती के बाद न केवल नई कार की बिक्री बल्कि पुरानी कार की बिक्री में भी तेजी आने की उम्मीद है। इसकी वजह ये है कि टैक्स कम होने के बाद नई आईसीई पावर्ड कार की कीमत कम हो गई है, जिसका असर पुरानी कार की कीमत पर पड़ रहा है।
इसका मतलब ये है कि नई कार किफायती होने से पुरानी कार के मूल्यांकन पर असर पड़ता है, खासकर उन मॉडल पर जो महज दो से तीन साल पुराने हैं।
इससे सेकंड हैंड कार की बिक्री में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि होने की संभावना है, साथ ही ट्रेड-इन वॉल्यूम में भी वृद्धि होगी। क्योंकि ग्राहक नई और ज्यादा किफायती मॉडल के लिए पुरानी कार एक्सचेंज करते हैं, जिससे यूज्ड सेगमेंट में ज्यादा कारें प्रवेश करती है। इसलिए, कुल मिलाकर जीएसटी कटौती सेकंड हैंड कार बाजार के लिए एक अच्छा संकेत है, जिससे खरीदारों को फायदा होगा।
आगे की राह

उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद, भारत अभी भी पुरानी कारों की तुलना में नई कारों की बिक्री के अनुपात में वैश्विक स्तर पर विकसित बाजारों से काफी पीछे है, जो भविष्य में वृद्धि की ओर इशारा करता है। पुरानी कार का बाजार लचीला साबित हुआ है, यहां तक कि महामारी और सेमीकंडक्टर की कमी जैसी चुनौतियों के दौरान भी पुरानी कार की बिक्री में वृद्धि दर्ज हुई, जबकि इस दौरान नई कारों का उत्पादन बाधित हुआ था।
हालांकि आर्गनाइज्ड कंपनियों को प्रॉफिट कमाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। क्रिसिल रेटिंग की डायरेक्टर पूनम उपाध्याय के अनुसार, यदि लागत में लचीलापन बनाए रखने की मौजूदा गति बनी रही, तो अधिकांश कंपनियां अगले 12-18 महीनों में प्रॉफिट में आ जाएंगी।














