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    आपकी कार खुद लगाएगी ब्रेक: सरकार ने 2030 से AEB अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया!

    सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय चाहता है कि इमरजेंसी में भारत में हर नई कार आपके लिए ब्रेक लगाए। इस ड्राफ्ट का क्या मतलब है, और इसमें अभी क्या नहीं बताया गया है, यह यहां बताया गया है।

    तीर्थ
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    published on अक्टूबर 24, 2026 11:39 ist
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    published onOct 24, 2026 11:39 IST
    last updated onOct 24, 2026 11:39 IST
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    Auto Emergency Braking (AEB) and more proposed by Govt

    सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें 2030 तक भारत में बिकने वाली सभी नई पैसेंजर कारों में ऑटोनॉमस इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB) को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव है। अगर यह प्रस्ताव कानून बन जाता है, तो अक्टूबर 2030 से लॉन्च होने वाले सभी नए मॉडल्स और अक्टूबर 2032 तक मौजूदा सभी मॉडल्स में यह सेफ्टी फीचर स्टैंडर्ड होगा। यह कदम सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव ला सकता है, जहां कारें टक्कर की आशंका होने पर ड्राइवर के एक्शन लेने से पहले खुद ही ब्रेक लगा सकेंगी।

    ड्राफ्ट में क्या प्रस्तावित है?

    AEB इस ड्राफ्ट का मुख्य आकर्षण है, लेकिन मंत्रालय ने कई अन्य सेफ्टी फीचर्स के लिए भी नियम प्रस्तावित किए हैं। ये नियम धीरे-धीरे लागू होंगे और इनका मकसद भारतीय सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों को सुरक्षित बनाना है।

    • स्टीयरिंग एफर्ट (AIS-193): अक्टूबर 2027 से, सभी कारों, एसयूवी बसों और ट्रकों के लिए यह अनिवार्य होगा कि उनका स्टीयरिंग व्हील घुमाने में लगने वाला जोर एक तय मानक के अनुरूप हो। यह सुनिश्चित करेगा कि इमरजेंसी के समय ड्राइवर आसानी से गाड़ी को कंट्रोल कर सके। इसका सीधा मतलब यह हो सकता है कि भविष्य में बिकने वाले लगभग सभी वाहनों में पावर स्टीयरिंग स्टैंडर्ड फीचर बन जाएगा।

    Auto Emergency Braking (AEB) and more proposed by Govt

    • ऑटोमैटिक स्टीयरिंग फंक्शन (ACSF, AIS-193): लेन-सेंटरिंग जैसे फीचर्स, जिनमें कार खुद स्टीयरिंग को कंट्रोल करती है, के लिए भी मानक तय किए गए हैं। अक्टूबर 2027 से, जिन कारों में यह फीचर होगा, उन्हें इन मानकों का पालन करना होगा। इसके अलावा, अक्टूबर 2029 से टैक्सी और अन्य कमर्शियल ट्रांसपोर्ट के तौर पर रजिस्टर्ड कारों के लिए यह फीचर अनिवार्य हो जाएगा।

    • इमरजेंसी लेन कीपिंग सिस्टम (ELKS, AIS-191 Part 1): इसे आम भाषा में लेन कीप असिस्ट कहा जाता है। यह फीचर ड्राइवर के अनजाने में अपनी लेन से बाहर जाने पर गाड़ी को वापस लेन में ले आता है। अक्टूबर 2027 से, जिन कारों में यह फीचर दिया जाएगा, उन्हें भारतीय मानकों पर खरा उतरना होगा। अक्टूबर 2029 से यह टैक्सियों के लिए अनिवार्य होगा।

    • ड्राइवर ड्राउजीनेस और अटेंशन वार्निंग (AIS-184): यह सिस्टम ड्राइवर की थकान या ध्यान भटकने के संकेतों को पहचानकर उसे ब्रेक लेने के लिए अलर्ट करता है। यह भी अक्टूबर 2027 से वैकल्पिक फीचर के तौर पर मानकों के तहत आएगा और अक्टूबर 2029 से टैक्सियों के लिए जरूरी हो जाएगा।

    Auto Emergency Braking (AEB) and more proposed by Govt

    • चाइल्ड-सीट माउंट्स (AIS-182): हालांकि ड्राफ्ट में आईएसओफिक्स को अनिवार्य नहीं किया गया है, लेकिन यह प्रस्ताव है कि जिन कारों में आईएसओफिक्स एंकर, टॉप-टेदर पॉइंट या i-Size सीटिंग दी गई है, उन्हें एक साझा मानक का पालन करना होगा। यह नियम नए मॉडल्स के लिए अक्टूबर 2027 से और मौजूदा सभी मॉडल्स के लिए अक्टूबर 2028 से लागू होगा।

    • लगेज रिटेंशन (IS 15546:2005): यह एक महत्वपूर्ण और अनिवार्य प्रस्ताव है। इसके तहत, अप्रैल 2028 से सभी नए मॉडल्स और अक्टूबर 2028 से सभी मौजूदा मॉडल्स को एक ऐसा मानक पूरा करना होगा जो टक्कर की स्थिति में बूट में रखे सामान को उड़कर केबिन में आने से रोके।

    प्रस्तावित टाइमलाइन

    AEB को अनिवार्य करने का प्रस्ताव एक लंबी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे अगले पांच सालों में तीन चरणों में लागू करने की योजना है। यह टाइमलाइन सुनिश्चित करती है कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को इन बदलावों को अपनाने के लिए पर्याप्त समय मिले।

    प्रस्तावित तारीख

    क्या बदलेगा

    किस पर लागू

    1 अक्टूबर 2027

    स्टीयरिंग एफर्ट AIS-193 पर खरा उतरे, ऑटोमैटिक स्टीयरिंग (ACSF) और इमरजेंसी लेन कीपिंग (ELKS) वाले मॉडल्स को क्रमशः AIS-193 और AIS-191 (Part 1) का पालन करना होगा।

    सभी मोटर वाहन (स्टीयरिंग), ACSF या ELKS देने वाली M1 कैटेगरी की कारें।

    1 अक्टूबर 2028

    जिन कारों में AEB पहले से मौजूद है, उन्हें भारत के AEB मानक AIS-185 को पास करना होगा। लगेज रिटेंशन अनिवार्य होगा।

    M1 कारें और N1 गुड्स वाहन (3.5 टन तक)।

    1 अक्टूबर 2029

    ACSF और ELKS फीचर्स अनिवार्य होंगे।

    ट्रांसपोर्ट के रूप में रजिस्टर्ड M1 कारें (जैसे टैक्सी)।

    1 अक्टूबर 2030

    AEB अनिवार्य होगा।

    सभी नए लॉन्च होने वाले M1 कैटेगरी के मॉडल।

    1 अक्टूबर 2032

    AEB अनिवार्य होगा।

    बिक्री पर मौजूद सभी M1 कैटेगरी के मॉडल, पुराने भी।

    यहां M1 कैटेगरी का मतलब ड्राइवर के अलावा आठ सीटों तक की पैसेंजर कारें हैं, और N1 का मतलब 3.5 टन तक के हल्के कमर्शियल वाहन हैं।

    AEB क्या है?

    ऑटोनॉमस इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB) एक एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) का हिस्सा है। यह सिस्टम गाड़ी के सामने लगे कैमरा, रडार या दोनों का उपयोग करके सड़क पर नजर रखता है। यह लगातार आगे चल रहे वाहनों, पैदल चलने वालों और अन्य बाधाओं की दूरी और गति का आकलन करता है।

    Auto Emergency Braking (AEB) and more proposed by Govt
    Auto Emergency Braking (AEB) and more proposed by Govt

    अगर सिस्टम को लगता है कि टक्कर होने की आशंका है, तो यह सबसे पहले ड्राइवर को ऑडियो (बीप) या विजुअल (डैशबोर्ड पर लाइट) अलर्ट के जरिए चेतावनी देता है। यदि ड्राइवर इस चेतावनी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है, तो सिस्टम टक्कर को टालने या उसकी गंभीरता को कम करने के लिए अपने आप ब्रेक लगा देता है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि ड्राफ्ट सिर्फ AEB को अनिवार्य बना रहा है, ADAS के पूरे सूट को नहीं, जिसमें एडेप्टिव क्रूज कंट्रोल या लेन-कीप असिस्ट जैसे अन्य फीचर्स भी शामिल होते हैं।

    AEB क्या करता है?

    प्रस्तावित भारतीय मानक AIS-185 के तहत, AEB सिस्टम को कुछ खास स्थितियों में प्रदर्शन करना होगा:

    • खड़ी कार से बचाव: सिस्टम को 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार पर आगे खड़ी कार से होने वाली टक्कर को पूरी तरह से टालना होगा।

    • पैदल यात्री से बचाव: इसे 30 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति पर सड़क पार कर रहे एक बच्चे के आकार के डमी से टक्कर को पूरी तरह से बचाना होगा।

    • गति कम करना: 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार पर, सिस्टम को टक्कर की गति को काफी हद तक कम करना होगा, भले ही वह उसे पूरी तरह से टाल न पाए।

    • चेतावनी: ऑटोमैटिक ब्रेक लगाने से पहले, सिस्टम को कम से कम दो तरह से चेतावनी देनी होगी - जैसे कि आवाज, स्टीयरिंग व्हील में वाइब्रेशन या डैशबोर्ड पर विजुअल अलर्ट।

    • ड्राइवर ओवरराइड: ड्राइवर किसी भी समय स्टीयरिंग घुमाकर या एक्सीलरेटर दबाकर AEB सिस्टम को ओवरराइड कर सकता है।

    • डिफ़ॉल्ट ऑन: AEB को 10 किलोमीटर प्रति घंटे से ऊपर की गति पर बंद नहीं किया जा सकता। अगर ड्राइवर इसे बंद कर भी देता है, तो हर बार गाड़ी दोबारा स्टार्ट होने पर यह सिस्टम अपने आप फिर से चालू हो जाएगा।

    आपके लिए इसका क्या मतलब है?

    यह ड्राफ्ट अगर कानून बनता है तो कार खरीदने वालों और मालिकों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। जो लोग अभी कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, उन्हें इस प्रस्ताव के कारण अपनी खरीद टालने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि यह अभी कानून नहीं है और मौजूदा कार मालिकों के लिए कोई भी फीचर रेट्रोफिट करने की मांग नहीं करता है।

    Auto Emergency Braking (AEB) and more proposed by Govt

    अक्टूबर 2030 से लॉन्च होने वाले सभी नए मॉडल्स में AEB स्टैंडर्ड फीचर के तौर पर आएगा। वहीं, जो मॉडल्स पहले से बाजार में हैं, उन्हें अक्टूबर 2032 तक इस नियम का पालन करना होगा। इसका एक असर यह हो सकता है कि एंट्री-लेवल कारें महंगी हो जाएं, क्योंकि वर्तमान में ज्यादातर बजट कारों में यह टेक्नोलॉजी नहीं दी जाती है। ड्राफ्ट में इस लागत वृद्धि का कोई अनुमान नहीं दिया गया है।

    हालांकि, इसका एक बड़ा फायदा क्वालिटी में सुधार होगा। 2028 से, AEB वाली हर कार को एक तय टेस्ट पास करना होगा, जिससे यह सिर्फ एक कागजी फीचर न रहकर असल में काम करने वाली तकनीक बनेगी। परिवारों के लिए भी अच्छी खबर है, क्योंकि 2028 तक चाइल्ड-सीट माउंट और लगेज रिटेंशन के लिए ठोस मानक लागू हो जाएंगे, जो बच्चों की सुरक्षा बढ़ाएंगे। टैक्सी ड्राइवरों और ऑपरेटरों के लिए बदलाव जल्दी आएंगे, क्योंकि अक्टूबर 2029 से उनकी गाड़ियों में लेन-कीपिंग और ड्राउजीनेस अलर्ट जैसे फीचर्स अनिवार्य हो जाएंगे।

    ड्राफ्ट क्या नहीं बताता?

    यह ड्राफ्ट कई जरूरी सवालों के जवाब नहीं देता, जो भारतीय सड़कों की हकीकत को देखते हुए काफी महत्वपूर्ण हैं:

    • दोपहिया और साइकिल सवार: प्रस्तावित AIS-185 मानक AEB को सिर्फ कारों और पैदल यात्रियों के खिलाफ टेस्ट करता है। साइकिल सवारों से जुड़े टेस्ट को बाद के लिए छोड़ दिया गया है और दोपहिया वाहनों का कोई जिक्र नहीं है। भारतीय सड़कों पर दोपहिया वाहनों की भारी संख्या को देखते हुए यह एक बहुत बड़ी कमी है।

    • रफ्तार की सीमा: AEB को सिर्फ 10 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे (पैदल यात्री के लिए 20 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे) की शहरी रफ्तार सीमा में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। सारे टेस्ट भी दिन की रोशनी में होते हैं। इसका मतलब है कि यह हाईवे पर तेज गति से होने वाले हादसों से सुरक्षा नहीं देता और रात में पैदल चलने वालों के लिए इसकी प्रभावशीलता का कोई टेस्ट मानक नहीं है।

    Auto Emergency Braking (AEB) and more proposed by Govt

    • "नया मॉडल" की परिभाषा: यह स्पष्ट नहीं है कि किसी मौजूदा कार के फेसलिफ्ट या नए वेरिएंट को 2030 की डेडलाइन के लिए "नया मॉडल" माना जाएगा या नहीं। इस अस्पष्टता का फायदा उठाकर कंपनियां पुराने मॉडल्स को मामूली बदलावों के साथ लंबे समय तक बेच सकती हैं।

    • भारतीय ट्रैफिक की चुनौतियां: भारतीय सड़कों पर अचानक सामने आने वाले मवेशी, बिना निशान वाले स्पीड ब्रेकर और कहीं से भी बीच में आ जाने वाले वाहन AEB सिस्टम को कन्फ्यूज कर सकते हैं। इससे या तो सिस्टम बेवजह ब्रेक लगा सकता है या फिर असली खतरे को नजरअंदाज कर सकता है।

    • कमर्शियल वाहन: छोटे पिकअप जैसे N1 कैटेगरी के वाहनों के लिए AEB अनिवार्य नहीं है। उन्हें AIS-185 मानक का पालन सिर्फ तभी करना है जब वे यह फीचर देते हैं।

    याद रखें: यह अभी सिर्फ एक ड्राफ्ट है

    यह समझना महत्वपूर्ण है कि यह अभी सिर्फ एक प्रस्ताव है और कुछ भी अंतिम नहीं है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस ड्राफ्ट को 21 अक्टूबर, 2026 को गजट में प्रकाशित किया था और इस पर जनता, स्टेकहोल्डर्स और इंडस्ट्री से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।

    इस फीडबैक के आधार पर, मंत्रालय इन नियमों को जस का तस मंजूर कर सकता है, उनमें बदलाव कर सकता है, या उन्हें पूरी तरह से वापस भी ले सकता है। यदि आप इस प्रस्ताव पर अपनी राय देना चाहते हैं, तो आप comments-morth@gov.in पर ईमेल भेज सकते हैं।

    कारदेखो का क्या है कहना

    कागजों में AEB को अनिवार्य बनाना एक स्वागत योग्य कदम है। सेफ्टी टेक्नोलॉजी को सिर्फ एक मार्केटिंग टूल न रहने देकर उसे तय मानकों पर परखने की कोशिश भी सही दिशा में है। लेकिन भारतीय सड़कों की हकीकत में सिर्फ अच्छी नीयत काफी नहीं होती।

    पहली चिंता इसकी रोजमर्रा की उपयोगिता को लेकर है। प्रस्तावित नियम के अनुसार, AEB हर बार कार स्टार्ट करने पर अपने आप चालू हो जाएगा। भीड़-भाड़ वाले ट्रैफिक में, जहां गाड़ियां एक-दूसरे से सटकर चलती हैं, यह सिस्टम बार-बार बेवजह अलर्ट दे सकता है या ब्रेक लगा सकता है, जो ड्राइवर के लिए परेशानी का सबब बन सकता है।

    Auto Emergency Braking (AEB) and more proposed by Govt

    सबसे बड़ी चिंता यह है कि ड्राइवर और सिस्टम एक-दूसरे के साथ कैसे तालमेल बिठाएंगे। ज्यादातर भारतीय ड्राइवरों ने कभी AEB का अनुभव नहीं किया है। कार का अचानक अपने आप ब्रेक लगाना न सिर्फ ड्राइवर को, बल्कि पीछे चल रहे वाहन को भी चौंका सकता है। भारतीय सड़कों पर गायों का अचानक सामने आना या एक सेकंड पहले गायब स्कूटर का कहीं से भी प्रकट हो जाना आम बात है। यूरोप के अनुशासित ट्रैफिक के लिए बने सिस्टम भारतीय सड़कों पर या तो प्लास्टिक की थैली पर ब्रेक मार सकते हैं या फिर बोनट के आगे से निकलती बाइक को अनदेखा कर सकते हैं। ऐसे में, टक्कर रोकने के लिए बनाया गया यह फीचर कुछ नई टक्करों की वजह भी बन सकता है, खासकर जब पीछे वाला ड्राइवर बंपर से कुछ इंच की दूरी बनाए रखने को आदर्श ड्राइविंग मानता हो।

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    Tirth Pandya is a Senior Correspondent with the CarDekho Group and an automotive media professional with over 6 years of experience covering cars, EVs, and the ever-evolving world of mobility. An Automobile Engineering graduate, he specialises in automotive news, feature writing, launch coverage, and experiential storytelling. His love for machines began long before his professional career, fuelled by an enduring fascination with cars and even aeroplanes. Since entering the industry in 2020, he has spent countless hours on the road, chasing stories that take him from bustling city streets to remote off-road trails, always searching for the next great automotive experience. He combines technical expertise with a genuine passion for driving and exploration to bring readers engaging, insightful, and human-centric stories that capture not just the machines but also the emotions, adventures, and people behind them.और देखें

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