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    कार खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर: 1 अप्रैल 2027 से CAFE 3 नॉर्म्स लागू होंगे, कारों का प्रदूषण घटेगा और माइलेज बढ़ेगा!

    नए CAFE 3 नॉर्म्स से ज्यादा हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कार मार्केट में आ सकती हैं

    सोनू
    सोनू
    Published On अक्टूबर 01, 2026 11:30 ist
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    published onOct 01, 2026 11:30 IST
    last updated onOct 01, 2026 11:30 IST
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    New Cafe 3 norms

    भारतीय ऑटो इंडस्ट्री 2027 में एक बड़े बदलाव के लिए तैयार हो रही है। सरकार ने नए CAFE 3 नॉर्म्स (कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकॉनमी) को लागू करने की घोषणा कर दी है, जिससे कार कंपनियों को पहले से ज्यादा फ्यूल-एफिशिएंट और कम प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियां बनानी होंगी। ये नए नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे और 31 मार्च 2032 तक चलेंगे। इस बदलाव से कार कंपनियों को अपनी लाइनअप में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कार की संख्या बढ़ाने के लिए भी प्रोत्साहन मिलेगा। CAFE नॉर्म्स असल में क्या है, और नई कार खरीदने की प्लानिंग कर रहे व्यक्ति के लिए इनका क्या मतलब है? आइए समझते हैं!

    CAFE नॉर्म्स क्या हैं?

    CAFE यानी कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकॉनमी, कार निर्माताओं के लिए सरकार द्वारा तय किए गए फ्यूल-एफिशिएंसी के नियम हैं। इन नियमों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कार कंपनियां ऐसी गाड़ियां बनाएं जो कम फ्यूल की खपत करें और पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचाएं। सरकार हर वित्तीय वर्ष में किसी एक कार निर्माता द्वारा बेची गई सभी कारों की औसत फ्यूल खपत का हिसाब लगाती है।

    New Cafe 3 norms

    इसकी गणना एक खास तरीके से की जाती है। इसमें कंपनी की सभी गाड़ियों के औसत वजन की तुलना उनकी ओवरऑल फ्यूल एफिशिएंसी और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन से की जाती है। इसका सीधा नतीजा यह होता है कि निर्माताओं पर हल्की, साफ-सुथरी और ज्यादा माइलेज देने वाली कार बनाने का दबाव बनता है।

    अभी भारत में CAFE 2 नॉर्म्स लागू हैं, जो अप्रैल 2022 से प्रभावी हुए थे। इन नियमों के तहत, औसत वाहन वजन 1082 किलोग्राम के आधार पर, फ्यूल खपत का लक्ष्य 4.78 लीटर/100 किलोमीटर (यानी लगभग 20.92 किलोमीटर प्रति लीटर) से कम रखा गया है। यह लगभग 113 ग्राम/किलोमीटर CO₂ उत्सर्जन के बराबर है। यहां यह समझना जरूरी है कि यह एक "फ्लीट एवरेज" है। इसका मतलब यह नहीं कि हर बिकने वाली कार को 20.92 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देना ही होगा। अगर कोई कंपनी बड़ी, कम माइलेज वाली एसयूवी कार बेचती है, तो उसे अपने फ्लीट एवरेज को संतुलित करने के लिए ज्यादा फ्यूल-एफिशिएंट हैचबैक, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कार भी बेचनी पड़ती हैं।

    CAFE 3 में क्या बदल रहा है?

    नए CAFE 3 नॉर्म्स मौजूदा नियमों को और भी सख्त बनाएंगे। 2027 से 2032 के बीच इन लक्ष्यों को चरणबद्ध तरीके से और कड़ा किया जाएगा। हर निर्माता के लिए सटीक लक्ष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि उसकी बेची गई कारों का औसत वजन कितना है। आसान शब्दों में कहें तो, कार कंपनियों को अगले पांच सालों में अपने पूरे पोर्टफोलियो को पहले से कहीं ज्यादा फ्यूल-एफिशिएंट बनाना होगा।

    कंपनियां इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए तीन मुख्य रास्ते अपना सकती हैं:

    • मौजूदा पेट्रोल और डीजल इंजनों को और बेहतर बनाना ताकि वे कम फ्यूल में ज्यादा चल सकें।

    • अपनी लाइनअप में ज्यादा हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करना।

    • ऐसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना जो गाड़ी की कुल फ्यूल खपत को कम करने में मदद करे।

    इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड को मिलेगा फायदा

    नए CAFE 3 नियमों की सबसे खास बातों में से एक है "सुपर-क्रेडिट" सिस्टम। यह सिस्टम इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड गाड़ियां बनाने वाले निर्माताओं को अतिरिक्त फायदा पहुंचाता है। इसके तहत, इलेक्ट्रिक, प्लग-इन हाइब्रिड, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बेचने पर कंपनियों को कंप्लायंस में अतिरिक्त लाभ मिलेगा। यह लाभ इस तरह काम करेगा:

    पावरट्रेन

    सुपर क्रेडिट

    बॉर्न ईवी / रेंज-एक्सटेंडर ईवी (REV)

    3x

    प्लग-इन हाइब्रिड व्हीकल / फ्लेक्स-फ्यूल हाइब्रिड

    2.5x

    स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड

    1.6x

    फ्लेक्स-फयूल व्हीकल

    1.1x

    उदाहरण के लिए, अगर कोई कंपनी 10,000 इलेक्ट्रिक कार बेचती है, तो CAFE नियमों की गणना के लिए उसके प्रभावी वॉल्यूम को 30,000 वाहन माना जा सकता है। यहां यह साफ करना जरूरी है कि इसका मतलब यह नहीं है कि एक EV को सचमुच तीन कारों की बिक्री के बराबर गिना जाता है। यह सिर्फ एक मैकेनिज्म है, जिससे EV बेचने पर निर्माता को अपने फ्लीट एवरेज लक्ष्यों को पूरा करने में बड़ी मदद मिलती है।

    क्या इससे ज्यादा हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कार आएंगी?

    इस सवाल का जवाब है: "हो सकता है, और उम्मीद भी यही है। "चूंकि इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड गाड़ियों पर इतना बड़ा कंप्लायंस बेनिफिट मिल रहा है, तो जाहिर है कि कार कंपनियां अपने पोर्टफोलियो में इनकी हिस्सेदारी बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान देंगी। हालांकि, CAFE 3 नियम कंपनियों को किसी तय संख्या में इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड कार बेचने के लिए मजबूर नहीं करते हैं।

    New Cafe 3 norms

    कंपनियां दूसरे तरीकों से भी अपने फ्लीट एवरेज को सुधार सकती हैं। वे ज्यादा एफिशिएंट पेट्रोल/डीजल इंजन बना सकती हैं या फिर ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल कर सकती हैं जो माइलेज बढ़ाने में मदद करें। सरकारी अधिसूचना में ऐसी 12 पात्र तकनीकों का उल्लेख है जिनका इस्तेमाल करके निर्माता फायदा उठा सकते हैं:

    • स्टार्ट-स्टॉप सिस्टम

    • टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS)

    • रीजनरेटिव ब्रेकिंग

    • 6-स्पीड या उससे ज्यादा का ट्रांसमिशन

    • एफिशिएंट 12V/48V अल्टरनेटर

    • 12V/48V मोटर-जनरेटर

    • एक्सटीरियर एलईडी लाइटिंग

    • एडवांस्ड ग्लेजिंग

    • इलेक्ट्रिक वॉटर पंप

    • हाई-एफिशिएंसी एयर-कंडीशनिंग

    • सोलर-रिफ्लेक्टिव पेंट

    • पीडब्ल्यूएम-कंट्रोल्ड रेडिएटर फैन

    इन तकनीकों का इस्तेमाल करके कंपनियां अधिकतम 9 ग्राम/किलोमीटर कार्बन उत्सर्जन के बराबर लाभ पा सकते हैं।

    आपके लिए CAFE 3 का क्या मतलब है?

    अगर आप एक आम कार खरीदार हैं, तो इन नियमों से आपके लिए तुरंत कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा। आपको अचानक से अपनी पेट्रोल/डीजल कार छोड़कर इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी, और न ही आपकी मौजूदा कार इन नए नियमों की वजह से नॉन-कंप्लायंट हो जाएगी। इसका असर अगले कुछ सालों में कार कंपनियों की भविष्य की प्रोडक्ट योजनाओं, नई लॉन्च और बिक्री की रणनीति में धीरे-धीरे दिखेगा।

    New Cafe 3 norms

    एक ग्राहक के तौर पर, आप आने वाले समय में ये बदलाव देख सकते हैं:

    • ज्यादा हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कार के विकल्प

    • ज्यादा फ्यूल-एफिशिएंट पेट्रोल और डीजल इंजन

    • स्टैंडर्ड फीचर्स में बढ़ोतरी

    • वाहन उत्सर्जन को कम करने पर अधिक जोर

    • प्रोडक्ट रणनीति में बदलाव

    एक बदलाव यह आएगा कि निर्माताओं को अब अपनी गाड़ियों की र्कान उत्सर्जन परफॉर्मेंस को MIDC (मॉडिफाइड इंडियन ड्राइविंग साइकिल) और WLTP (वर्ल्डवाइड हार्मोनाइज्ड लाइट व्हीकल टेस्ट प्रोसीजर) दोनों में रिपोर्ट करना होगा। हालांकि, सरकार ने अभी तक CAFE लक्ष्यों के लिए MIDC से WLTP में बदलने का कन्वर्जन फैक्टर अधिसूचित नहीं किया है।

    कारदेखो का क्या है कहना

    CAFE 3 नियम इस बारे में कम हैं कि आप आज कौनसी कार चलाते हैं, और इस बारे में ज्यादा हैं कि निर्माता कल कौनसी कारें बेचेंगे। खरीदारों के लिए इसका सबसे बड़ा मतलब यह है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड गाड़ियां निर्माताओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाएंगी, जबकि पेट्रोल और डीजल गाड़ियों को भी मार्केट में बने रहने के लिए पहले से कहीं ज्यादा एफिशिएंट बनना होगा।

    हाकिकि, CAFE टारगेट को अपनी कार के फ्यूल इकॉनमी के आंकड़े से कन्फ्यूज न करें। CAFE एक निर्माता के पूरे पोर्टफोलियो का औसत है, यह हर एक मॉडल के लिए न्यूनतम माइलेज की कोई शर्त नहीं है।

    ये नियम अप्रैल 2027 से लागू होंगे और 2032 तक धीरे-धीरे और सख्त होते जाएंगे। इसलिए, अगले कुछ सालों में भारतीय कार बाजार में ज्यादा ईवी और माइलेज पर फोकस करने वाली टेक्नोलॉजी का आना लगभग तय है। यह बदलाव ग्राहकों के लिए फायदेमंद हो सकता है क्योंकि उन्हें ज्यादा एफिशिएंट और मॉडर्न टेक्नोलॉजी वाली गाड़ियों के ज्यादा विकल्प मिलेंगे।

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