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    क्या भारत में अक्टूबर 2028 तक 'व्हीकल-टू-व्हीकल कम्युनिकेशन' होगा अनिवार्य?

    अगर यह नोटिफ़िकेशन लागू हो जाता है, तो 2028 तक सभी नई कारों में इन-बिल्ट वी2वी कम्युनिकेशन सिस्टम होना ज़रूरी हो सकता है।

    ved
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    Published On अगस्त 05, 2026 14:54 ist
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    published onAug 05, 2026 14:54 IST
    last updated onAug 05, 2026 14:54 IST
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    V2V Communications

    भारत के सड़क परिवहन मंत्रालय ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके तहत अक्टूबर 2028 से सभी नई गाड़ियों में व्हीकल-टू-व्हीकल (वी2वी) कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी को अनिवार्य किया जा सकता है, जो भारतीय सड़कों पर सेफ्टी को हमेशा के लिए बदल सकता है।

    वी2वी टेक्नोलॉजी क्या है और यह कैसे काम करेगी?

    व्हीकल-टू-व्हीकल (वी2वी) कम्युनिकेशन एक ऐसी एडवांस्ड वायरलेस टेक्नोलॉजी है जो गाड़ियों को आपस में सीधे "बात" करने की सुविधा देती है। इस सिस्टम के तहत, सड़क पर चल रही कारें, मोटरसाइकिलें और कमर्शियल वाहन एक-दूसरे के साथ रियल-टाइम में जरूरी डेटा शेयर कर सकते हैं, और इसके लिए किसी मोबाइल नेटवर्क की भी जरूरत नहीं होती। सरकार ने इस इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम (आईटीएस) के लिए खास तौर पर 5.875 जीएचजेड से 5.925 जीएचजेड का फ्रीक्वेंसी बैंड आवंटित किया है। यह एक डेडिकेटेड चैनल है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि गाड़ियों के बीच कम्युनिकेशन बिना किसी रुकावट के हो।

    इस टेक्नोलॉजी के माध्यम से, वाहन लगातार अपनी पोज़िशन, स्पीड, चलने की दिशा, और ब्रेकिंग या एक्सीलरेशन जैसी अहम जानकारी एक-दूसरे को भेजते रहते हैं। यह सब कुछ ऑटोमैटिक तरीके से होता है। भारत में इसके लिए एआईएस-230 (ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड) नामक मानक तैयार किया गया है। इस मानक को सरकार द्वारा गठित 'टास्क फोर्स ऑन इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम्स' की मदद से विकसित किया गया है। यह अप्रोच यूरोप में पहले से लागू C-V2X (सेलुलर व्हीकल-टू-एवरीथिंग) फ्रेमवर्क से मिलती-जुलती है, जहां गाड़ियों के बीच कम्युनिकेशन के लिए एक डेडिकेटेड फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल होता है। यह सिस्टम गाड़ियों का एक ऐसा नेटवर्क बनाता है जो सड़क पर आने वाले खतरों से एक-दूसरे को पहले ही आगाह कर देता है।

    सड़क सुरक्षा पर इसका असर और मौजूदा एडीएएस से यह कैसे अलग है?

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    वी2वी कम्युनिकेशन का मुख्य मकसद सड़क दुर्घटनाओं में भारी कमी लाना है। यह टेक्नोलॉजी उन खतरों के बारे में भी ड्राइवर को एडवांस चेतावनी दे सकती है जो सीधे तौर पर दिखाई नहीं देते। उदाहरण के लिए, किसी अंधे मोड़ के दूसरी तरफ अगर कोई गाड़ी अचानक इमरजेंसी ब्रेक लगाती है, तो वी2वी सिस्टम से लैस आपकी कार को इसकी जानकारी तुरंत मिल जाएगी, भले ही वह गाड़ी आपकी नज़रों से दूर हो। इसी तरह, किसी चौराहे पर दूसरी सड़क से तेज़ी से आ रही कार या गलत दिशा में चल रहे वाहन के बारे में भी यह सिस्टम पहले से अलर्ट कर सकता है।

    यह मौजूदा एडीएएस (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम्स) से एक कदम आगे है। अभी की एडीएएस टेक्नोलॉजी कैमरा और रडार जैसे सेंसर पर निर्भर करती है, जिनकी एक सीमा होती है — वे केवल उन्हीं चीज़ों को देख सकते हैं जो उनकी 'लाइन-ऑफ-साइट' में हों। यानी अगर कोई खतरा किसी बिल्डिंग या मोड़ के पीछे है, तो एडीएएस उसे नहीं देख सकता। लेकिन वी2वी टेक्नोलॉजी इस बाधा को दूर करती है, क्योंकि यह रेडियो सिग्नल के ज़रिए काम करती है। यह भविष्य में वी2आई (व्हीकल-टू-इन्फ्रास्ट्रक्चर) कम्युनिकेशन की नींव भी रखेगा। वी2आई के तहत, गाड़ियां ट्रैफिक सिग्नल, पुल और फ्लाईओवर पर लगे सेंसर से भी डेटा एक्सचेंज कर सकेंगी, जिससे ट्रैफिक मैनेजमेंट और बेहतर होगा और जाम जैसी समस्याओं में कमी आएगी।

    कार खरीदारों और इंडस्ट्री के लिए इसके क्या मायने हैं?

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    यह प्रस्तावित नियम सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में एक बड़ा संशोधन होगा। इसे दो चरणों में लागू करने की योजना है, जिससे ऑटो इंडस्ट्री को तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

    • पहला चरण (1 अक्टूबर 2027): इस तारीख से, जो भी नई गाड़ियां स्वेच्छा से वी2वी सिस्टम के साथ आएंगी, उन्हें एआईएस-230 स्टैंडर्ड का पालन करना अनिवार्य होगा। यह एक तरह से इंडस्ट्री के लिए शुरुआती दौर होगा।

    • दूसरा चरण (1 अक्टूबर 2028): यह अनिवार्य कट-ऑफ तारीख है। इस दिन से भारत में बनने वाली और बिकने वाली सभी नई गाड़ियों में वी2वी कम्युनिकेशन सिस्टम स्टैंडर्ड फिटमेंट के तौर पर देना अनिवार्य हो जाएगा।

    यह नियम एल,एम और एन कैटेगरी की सभी गाड़ियों पर लागू होगा, जिसका मतलब है कि टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, पैसेंजर कारें, और ट्रक जैसे माल वाहक वाहन, सभी इसके दायरे में आएंगे। कार खरीदारों के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि अक्टूबर 2028 के बाद खरीदी गई हर नई गाड़ी पहले से ज़्यादा सुरक्षित होगी। हालांकि, इस नए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को गाड़ियों में जोड़ने से उनकी कीमतों में बढ़ोतरी होना तय है। ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में लागत पर कोई अनुमान नहीं दिया गया है, लेकिन यह एक अहम एक्टिव सेफ्टी फीचर होगा। अब तक हम पैसिव सेफ्टी फीचर्स जैसे एयरबैग और बिल्ड क्वालिटी पर निर्भर रहते थे, लेकिन यह नियम भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर को एक कनेक्टेड और कोऑपरेटिव सेफ्टी के नए युग में ले जाएगा। यह सेफ्टी स्टैंडर्ड में उतना ही बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, जितना 6 एयरबैग का नियम अकेले नहीं ला पाया।

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    ved
    Ved Kulkarni is a Correspondent with CarDekho Group, and an automotive journalist with over 5 years of experience under his belt covering cars, motorcycles, mobility solutions and everything in between. A Product Design graduate, he specialises in analysing market trends, testing cars, creating automotive content and gathering customer insights. His love for vehicles began early, and he has vast hands-on experience with everything from classic cars to imported exotics and even the regular mass market vehicles. His technical expertise, combined with a deep-rooted passion for all things automotive, helps give buyers holistic and knowledgeable advice. और देखें

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