उत्तर प्रदेश सड़क सुरक्षा के लिए एआई का इस्तेमाल करने वाला पहला राज्य बना, पायलट प्रोजेक्ट के लिए परिवहन मंत्रालय की मंजूरी मिली
पायलट प्रोजेक्ट का पहला प्रोटोटाइप 6 सप्ताह चलेगा, जिसमें सड़क दुर्घटना की रोकथाम में सुधार और बेहतर ट्रांसपोर्टेशन पॉलिसी बनाने के लिए सड़क से डेटा लिया जाएगा
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सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए उत्तर प्रदेश को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से एआई आधारित पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश भारत में इस तरह की अनूठी पहल करने वाला पहला राज्य बन गया है। आइए नीचे हम इस आगामी प्रोग्राम के बारे में विस्तार से जानते हैं:
ज्यादा जानकारी
ट्रायल प्रोजेक्ट के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 2025-26 के अपने वित्तीय बजट में 10 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं। कहा जा रहा है कि इसे सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी आईटीआई लिमिटेड द्वारा बड़े डाटा एनालिटिक्स को संभालने के लिए एमलोजिका के साथ मिलकर फ्री में लागू किया जाएगा।
टेस्ट का पहला प्रोटोटाइप 6 सप्ताह चलेगा, जिसमें दुर्घटना, गाड़ी, मौसम, सड़क विशेषताओं और ड्राइवर प्रोफाइल से प्राप्त डेटा से एआई मॉडल को कुशल बनाया जाएगा।
प्रोजेक्ट के फायदे

इस डेटा का उपयोग सड़क हादसों की पहचान करने और बेहतर सड़क सुरक्षा के लिए सुरक्षा मानदंडो और नीतियों को लागू करने के लिए किया जाएगा।
यह मॉडल सरकार को सड़क सुरक्षा से संबन्धित नीतियां बनाने के लिए रीयल-टाइम डेटा भी प्रदान करेगा। चूंकि यह डेटा एआई द्वारा दिया जाएगा, इसलिए यह भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं का पहले से अनुमान लगाकर उन्हें कम करने में भी मदद कर सकता है।

पायलट प्रोजेक्ट समाप्त होने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को दी जाएगी, जो सड़क सुरक्षा के बारे में जानकारी प्रदान करेगी, ताकि यह डेटा राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा उपायों में भी सुधार कर सके।
यह पायलट प्रोजेक्ट एक बड़ा बदलाव है कि कैसे भारत के राज्य सड़क दुर्घटनाओं के निपटने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो देश की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। उत्तर प्रदेश के नेतृत्व में, उम्मीद है कि यह एआई संचालित दृष्टिकोण जल्द ही सुरक्षित सड़कों और बेहतर ड्राइविंग परिस्थितियों के लिए एक राष्ट्रीय मानक बन जाएगा।














