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    सरकार ने ई20 पेट्रोल को पुरानी कारों के लिए सुरक्षित बताया: स्टडी क्या कहती है?

    भारत सरकार का कहना है कि चिंता की कोई बात नहीं है, लेकिन फिर भी आपकी गाड़ी का माइलेज कम हो सकता है

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    Published On अगस्त 03, 2026 11:09 ist
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    published onAug 03, 2026 11:09 IST
    last updated onAug 03, 2026 11:09 IST
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    ई20

    सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पुष्टि की है कि ई20 पेट्रोल (20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल) पुरानी कारों के लिए काफी हद तक सुरक्षित है। अप्रैल 2024 में ई20 फ्यूल के राष्ट्रव्यापी रोलआउट के बाद से, कई कार ओनर्स ने माइलेज में गिरावट और इंजन को संभावित नुकसान को लेकर चिंता जताई थी। लेकिन, अब सरकार ने एक स्टडी के आधार पर इन चिंताओं को दूर करने की कोशिश की है। 

    सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने क्या कहा है?

    सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि ई20 से ज्यादतर पुरानी कारों को कोई खास खतरा नहीं है। संसद में दिया गया यह बयान सरकार की ओर से करवाई गई एक स्टडी पर आधारित था, जिसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (आईआईपी), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (एसआईएएम) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) ने मिलकर किया था।

    कार एग्ज़हॉस्ट

    इस स्टडी का उद्देश्य यह जांचना था कि 20% एथेनॉल वाला पेट्रोल पुरानी गाड़ियों के इंजन और फ्यूल सिस्टम पर क्या असर डालता है। स्टडी के दौरान, बीएस-III स्टैंडर्ड वाली पुरानी कारों सहित कई गाड़ियों का परीक्षण किया गया। नतीजों में यह साफ हुआ कि ई20 के इस्तेमाल से इंजन के कंपोनेंट में कोई खराबी नहीं आई। पुराने फ्यूल सिस्टम के मेटल और प्लास्टिक पार्ट्स भी ठीक तरह से काम करते पाए गए, जिससे यह संकेत मिलता है कि लंबी अवधि में भी बड़े नुकसान का खतरा कम है। गडकरी ने यह भी कहा कि इंजन के पूरी तरह खराब होने को लेकर ऑनलाइन जो घबराहट फैली है, उसके पीछे कोई ठोस टेक्निकल डाटा नहीं है।

    आपकी कार पर इसका क्या असर होगा?

    अगर आपके पास पुरानी पेट्रोल कार है, खासकर बीएस-III या उससे पुराने नॉर्म्स वाली तो ई20 के इस्तेमाल से दो बातें सामने आती हैं: माइलेज में कमी आ सकती है और कुछ छोटे-मोटे पार्ट्स बदलने पड़ सकते हैं। माइलेज में कमी ऐसी चीज है जिसे ज्यादातर ड्राइवर सबसे पहले महसूस करेंगे। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, ई0 (शुद्ध पेट्रोल) की तुलना में ई20 फ्यूल इस्तेमाल करने पर माइलेज में 1 से 6 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि पेट्रोल के मुकाबले इथेनॉल में प्रति लीटर कम एनर्जी होती है, इसलिए उतनी ही पावर पाने के लिए इंजन को ज्यादा इथेनॉल जलाना पड़ता है। हालांकि, कुछ इंडिपेंडेंट टेस्ट और कई कार ओनर्स के अनुभव बताते हैं कि माइलेज में इससे कहीं ज्यादा कमी आ सकती है (कुछ मामलों में तो 10 प्रतिशत से भी ज्यादा) खासकर उन पुरानी कारों में जिन्हें इस तरह के ब्लेंड के हिसाब से कभी ट्यून नहीं किया गया था।

    जीप कंपास पेट्रोल

    इसके अलावा, एक और चिंता है जो खास तौर पर अप्रैल 2005 से 2016 के बीच बनी बीएस-III पेट्रोल गाड़ियों पर लागू होती है वह है मेंटेनेंस। पेट्रोल के मुकाबले इथेनॉल कई तरह के रबर और प्लास्टिक पर ज्यादा असर डालता है। स्टडी में यह बात सामने आई है कि इन खास मॉडल्स में फ्यूल लाइन, ओ-रिंग, सील और गैस्केट जल्दी खराब हो सकते हैं, उनमें दरारें आ सकती हैं या वे फूल सकते हैं। अगर लंबे समय तक इस पर ध्यान ना दिया जाए, तो इससे लीकेज हो सकता है। हालांकि, सरकार इसे कोई इमरजेंसी नहीं मान रही है। उसकी सलाह बस इतनी है कि आप अपनी कार की रेगुलर सर्विस के दौरान इन पार्ट्स की जांच करवाएं और अगर उनमें घिसावट दिखे तो उन्हें बदलवा लें। 

    आपको चिंता क्यों नहीं करनी चाहिए?

    फोक्सवैगन टाइगन

    ज्यादातर कार ओनर्स के लिए ई20 को लेकर घबराने की कोई बड़ी वजह नहीं है। 2016 के बाद बीएस4 मॉडल्स बनाने वाली कंपनियों ने पहले से ही हाई एथेनॉल ब्लेंड के लिए तैयारी शुरू कर दी थी। इन कारों के इंजन और फ्यूल सिस्टम में ऐसे मटीरियल का इस्तेमाल किया गया है जो एथेनॉल के लिए ज्यादा अनुकूल हैं। इसलिए, अगर आपकी कार 2016 के बाद की है, तो आपको किसी भी तरह की कोई चिंता की जरूरत नहीं है। यहां तक कि जो चिंता पुरानी बीएस-III कारों (2005-2016) के रबर पार्ट्स को लेकर जताई गई है, उसका समाधान भी काफी आसान और किफायती है। इन पार्ट्स को आप अपनी कार में रेगुलर सर्विसिंग के दौरान आसानी से बदलवा सकते हैं। यह एक मामूली मेंटेनेंस खर्च है, जो आपको भविष्य की किसी भी बड़ी परेशानी से बचा सकता है। आपका यह जानना भी जरूरी है कि 2023 से भारत में बिकने वाली हर नई कार पूरी तरह से ई20-कंपैटिबल है।

    ई2ओ फ्यूल से जुड़ी जानकारी

    ई20 फ्यूल 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण है। ई20 फ्यूल सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और पर्यावरण को बेहतर बनाना है। इसमें इस्तेमाल होने वाला एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है, जिसे गन्ने, मक्का और अन्य अनाज जैसे कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के कई फायदे हैं। सबसे पहला, यह कच्चे तेल के आयात पर हमारी निर्भरता को कम करता है। दूसरा, एथेनॉल के जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन जैसे हानिकारक प्रदूषकों का उत्सर्जन कम होता है, जिससे एयर क्वालिटी में सुधार होता है। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण, यह किसानों और चीनी उद्योग के लिए आय का एक अतिरिक्त स्रोत बनाता है, क्योंकि उनकी उपज का इस्तेमाल फ्यूल बनाने में भी होता है। भारत सरकार का लक्ष्य धीरे-धीरे एथेनॉल ब्लेंडिंग को और बढ़ाना है। भारत में 2023 से बिकने वाली हर नई कार का ई20-कम्प्लायंट होना जरूरी है, और कई कार बनाने वाली कंपनियों ने तो इस नियम के लागू होने से पहले ही अपनी गाड़ियों को ई20 के लिए मटीरियल-कम्प्लायंट बना लिया था।

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    <p><span id="docs-internal-guid-42688267-7fff-c39d-4c72-fec384069871"><span>मैंने अपनी करियर की शुरुआत एक जाने-माने मीडिया हाउस से शुरू की थी। रिपोर्टिंग करने से लेकर डेस्क वर्क करते हुए आज मुझे चार साल पूरे हो चुके हैं। मेरा कारदेखो में एक साल का सफर काफी दिलचस्प रहा है। मुझे शुरुआत से ही राइटिंग का काफी शौक है। हमेशा से ही मेरी रूचि ऑटो, मनोरंजन, लाइफस्टाइल&nbsp; या फिर टेक्नोलॉजी से संबंधित कंटेंट को लिखने में काफी रही है। इसी लिए मैंने अपना बैचलर्स भी जर्नलिस्म व मास कम्युनिकेशन में ही किया है जिससे कि मुझे तरह-तरह के कंटेंट को लिखने के लिए अच्छा-ख़ासा प्लेटफार्म मिल सके। कंटेंट लिखने के अलावा मुझे रिपोर्टिंग, फोटोग्राफी, म्युज़िक, डांस और ट्रेवलिंग का भी काफी शौक है। ट्रेवलिंग के जरिये नए लोगों से मिलने, नए कल्चर को अपनाने और नई जगहों को एक्सप्लोर करने में काफी रूचि है।</span></span></p>और देखें

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