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    नितिन गडकरी की अपील: कार कंपनियां एक साल में फ्लेक्स इंजन तैयार करने पर शुरू करें काम

    सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (एसआईएएम) के साथ हुई एक बैठक में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कार निर्माता कंपनियों से फ्लेक्स फ्यूल इंजन को अपनाने का आग्रह किया है।

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    Published On अगस्त 04, 2021 19:52 ist
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    published onAug 04, 2021 19:52 IST
    last updated onAug 04, 2021 19:52 IST
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    हालांकि, हमें इस बात की जानकारी नहीं है कि कार कंपनियों ने नितिन गडकरी की इस अपील पर कैसी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, लेकिन यह संभावना जरूर है कि कंपनियां इथेनॉल को पेट्रोल के एक संभावित विकल्प के रूप में जरूर चुन सकती हैं। हमारा ऐसा कहना इसलिए हैं क्योंकि:

    नितिन गडकरी कुछ समय से भारत के बदलते मोटर वाहन परिदृश्य के पीछे असली ताकत रहे हैं, चाहे बात फिर बीएस3 से बीएस4 में बदलाव लाने की हो या फिर बीएस5 को स्किप करते हुए बीएस6 को अपनाने की हो या नए क्रैश टेस्ट मानकों को लागू करने की हो। यह सभी बदलाव नितिन गडकरी के नेतृत्व में ही हुए हैं।

    हालांकि, नितिन गडकरी ने फिलहाल इसके बारे में कार कंपनियों से केवल अनुरोध किया है। इससे पहले उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि फ्लेक्स फ्यूल इंजन को जल्द ही भारत में अनिवार्य किया जा सकता है। ऐसे में कार कंपनियों को अब इस दिशा में तेज़ी से काम करना होगा जिससे मल्टी फ्यूल इंजन तैयार करने होंगे। 

    दूसरी ओर कार निर्माताओं के लिए भारत में फ्लेक्स फ्यूल इंजन पेश करना कोई बड़ी बात नहीं होगी। इसकी वजह यह है कि यह टेक्नोलॉजी पहले से ही मौजूद है और यह मल्टी-फ्यूल इंजन ब्राजील, कनाडा और यूएस जैसे देशों में पहले से ही मिलते हैं।

    इसके अलावा कंज़्यूमर भी पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का लगातार सामना कर रहे हैं। यहां तक ​​कि अगर पेट्रोल की कीमतें कम भी होती है तो वह जहां दो साल पहले थी उस पर कभी भी वापस लौट नहीं पाएगी। इथेनॉल (जो चीनी के प्रोडक्शन में एक बाय-प्रोडक्ट है) पेट्रोल के मुकाबले एक शानदार विकल्प साबित हो सकता है। यह पेट्रोल की तुलना में ज्यादा अफोर्डेबल ऑप्शन हो जाएगा क्योंकि इसका घरेलू उत्पादन आसानी से किया जा सकता है और इसे क्रूड ऑइल के मुकाबले इम्पोर्ट करने भी आवश्यकता नहीं है।

    कुल मिलाकर, फ्लेक्स फ्यूल इंजन को लागू करना व्हीकल मॉडिफिकेशन और ट्यूनिंग के मामले में एक बड़ी चुनौती होगी। अगर यह लागू होता है तो कारों की कीमतें 15,000 रुपए से लेकर 20,000 रुपये तक बढ़ सकती हैं। अगर आप विस्तार से अपनी कार पर इथेनॉल के प्रभाव को समझना चाहते हैं तो यहां पढ़ सकते हैं।

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    <p><span id="docs-internal-guid-42688267-7fff-c39d-4c72-fec384069871"><span>मैंने अपनी करियर की शुरुआत एक जाने-माने मीडिया हाउस से शुरू की थी। रिपोर्टिंग करने से लेकर डेस्क वर्क करते हुए आज मुझे चार साल पूरे हो चुके हैं। मेरा कारदेखो में एक साल का सफर काफी दिलचस्प रहा है। मुझे शुरुआत से ही राइटिंग का काफी शौक है। हमेशा से ही मेरी रूचि ऑटो, मनोरंजन, लाइफस्टाइल&nbsp; या फिर टेक्नोलॉजी से संबंधित कंटेंट को लिखने में काफी रही है। इसी लिए मैंने अपना बैचलर्स भी जर्नलिस्म व मास कम्युनिकेशन में ही किया है जिससे कि मुझे तरह-तरह के कंटेंट को लिखने के लिए अच्छा-ख़ासा प्लेटफार्म मिल सके। कंटेंट लिखने के अलावा मुझे रिपोर्टिंग, फोटोग्राफी, म्युज़िक, डांस और ट्रेवलिंग का भी काफी शौक है। ट्रेवलिंग के जरिये नए लोगों से मिलने, नए कल्चर को अपनाने और नई जगहों को एक्सप्लोर करने में काफी रूचि है।</span></span></p>और देखें

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    1 कमेंट
    1
    S
    sharad
    Aug 5, 2021, 3:59:34 PM

    Adoption of two wheel electric in recent future will also help in reducing the price of airlines due to crude availability. Ethanol is a pure substitute of petrol and a minor ?change in engine functions

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