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    ई2ओ पेट्रोल सुरक्षित है या नहीं? सियाम और पेट्रोलियम मंत्रालय ने जो कहा, सब जान लीजिए

    सियाम के एक लीक हुए लेटर ने ई2ओ फ़्यूल को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी हैं, लेकिन असल में इंडस्ट्री बॉडी, सरकार और उपलब्ध तथ्य क्या कहते हैं, यहाँ बताया गया है।

    तीर्थ
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    Published On अगस्त 06, 2026 11:38 ist
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    published onAug 06, 2026 11:38 IST
    last updated onAug 06, 2026 11:38 IST
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    E20

    हाल ही में सियाम (सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफ़ैक्चरर्स) की एक लीक हुई चिट्ठी ने ई2ओ पेट्रोल को लेकर कार मालिकों के बीच चिंता पैदा कर दी, जिसके बाद सियाम और पेट्रोलियम मंत्रालय दोनों ने इस पर अपनी सफाई दी है। यहां वह सब कुछ है जो दोनों पक्षों ने कहा है।

    खास बातें

    • ई2ओ पेट्रोल से कुछ पार्ट्स के खराब होने की आशंका वाली सियाम की चिट्ठी अब वापस ले ली गई है।

    • सरकार के मुताबिक, क्लोराइड की दिक्कत 87,000 पेट्रोल पंपों में से महज 2 जगहों पर मिली — यानी यह कोई आम बात नहीं, बल्कि एक अपवाद है।

    • ई2ओ पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित है, क्योंकि बाजार में आने से पहले हर फ्यूल 150 से ज्यादा क्वालिटी टेस्ट से गुजरता है।

    • ई2ओ-रेडी कारों के मालिकों के लिए अभी कोई टेंशन नहीं, पर पुरानी गाड़ियों के लिए ई1ओ पेट्रोल मिलता रहे — यह जरूर देखना होगा।

    क्या थी असली चिंता?

    सियाम की चिट्ठी में फ्यूल इंजेक्टर, फ्यूल पंप और ईजीआर वॉल्व जैसे पार्ट्स को फ्यूल में मिलावट के कारण नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई थी।

    पूरे मामले की शुरुआत सियाम की एक चिट्ठी से हुई, जो 28 जुलाई को लीक हो गई। चिट्ठी में ई2ओ पेट्रोल (20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण) को लेकर कुछ गंभीर तकनीकी चिंताएं थीं। बात सीधी थी — नहीं, बात सीधी यह थी कि फ्यूल में क्लोराइड और जरूरत से ज़्यादा मॉइस्चर होने पर कार के तीन अहम पार्ट्स को नुकसान पहुंच सकता है। ये पार्ट्स हैं फ्यूल इंजेक्टर, फ्यूल पंप और ईजीआर (एग्ज़ॉस्ट गैस रीसर्क्युलेशन) वॉल्व।

    चिट्ठी के मुताबिक, फ्यूल इंजेक्टर बंद हो जाए तो इंजन में मिसफायर होता है, पिकअप कमज़ोर पड़ती है और माइलेज भी गिरने लगती है। फ्यूल पंप का फेल होना और भी खतरनाक है क्योंकि गाड़ी बीच रास्ते बंद हो सकती है। ईजीआर वॉल्व खराब होने पर इंजन रफ चलता है और एमिशन टेस्ट में गाड़ी फेल हो जाती है। लेकिन एक ज़रूरी बात — चिट्ठी में सीधे ई2ओ को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया था। असली वजह पुराने स्टोरेज टैंक और ट्रांसपोर्टेशन चेन में हुई संभावित मिलावट को बताया गया था।

    सियाम की सफाई: 'बात का बतंगड़ बनाया गया'

    सियाम ने कहा, "चिट्ठी के कुछ हिस्सों को संदर्भ से हटाकर गलत तस्वीर पेश की गई।"

    खबर वायरल होते ही कार मालिकों में घबराहट फैल गई। इस पर सियाम ने फौरन सफाई दी और वह चिट्ठी वापस ले ली। संगठन का कहना था कि यह महज एक रूटीन तकनीकी चर्चा का हिस्सा था, कोई अलार्म या चेतावनी नहीं। साथ ही सियाम ने मीडिया पर आरोप लगाया कि चिट्ठी के कुछ हिस्सों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया, जिसने बेवजह की चिंता फैलाई।

    सियाम ने अपनी सफाई में यह भी कहा कि पार्ट्स खराब होने और मिलावट के आंकड़े अभी देशभर के डेटा से साबित नहीं हुए हैं। इथेनॉल में क्लोराइड और सल्फर की मात्रा 3 ppm (parts per million) तक सीमित रखने के नियम पहले से लागू हैं। तेल कंपनियों ने भी क्वालिटी चेक के लिए अतिरिक्त लेयर जोड़ी हैं। और सियाम का रुख साफ है — सरकार के ई2ओ रोलआउट को उसका पूरा समर्थन है, इस मिशन में वह सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार है।

    सरकार का जवाब: 'फ्यूल पूरी तरह सुरक्षित है'

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    पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, "कोई भी फ्यूल बाजार में बिकने से पहले 150 से ज्यादा अलग-अलग जांचों से गुजरता है।"

    सियाम की चिट्ठी से उठे इस विवाद पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी जल्दी से जवाब दिया। मंत्रालय ने इन आशंकाओं को सिरे से नकारा। साफ कहा कि भारत में बिकने वाले हर फ्यूल को बेहद कड़े क्वालिटी कंट्रोल प्रोसेस से गुजरना पड़ता है, और पेट्रोल पंप तक पहुंचने से पहले किसी भी फ्यूल की 150 से ज्यादा अलग-अलग जांचें होती हैं।

    क्लोराइड की समस्या पर मंत्रालय ने सीधा जवाब दिया। देशभर के करीब 87,000 पेट्रोल पंपों में से सिर्फ 2 जगहों पर यह गड़बड़ी मिली थी। यानी यह कोई बड़ा मसला नहीं, बस एक आईसोलेटेड केस है। मंत्रालय ने अपने राष्ट्रव्यापी टेस्टिंग सिस्टम का हवाला देते हुए साफ कहा कि फ्यूल की क्वालिटी से कोई समझौता नहीं होता, और कार मालिकों को परेशान होने की जरूरत नहीं।

    कार मालिकों के लिए इसका क्या मतलब है?

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    फिलहाल इंडस्ट्री-वाइड कोई पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए घबराने की कोई ठोस वजह नहीं है।

    तो फिर कार मालिकों को करना क्या चाहिए? अभी तक की जानकारी के मुताबिक, अगर आपकी कार ई2ओ-रेडी है (आमतौर पर 2023 के बाद के मॉडल), तो घबराने की कोई वजह नहीं है। पार्ट्स खराब होने या क्लोराइड मिलावट के जो दावे सामने आए थे, वे किसी बड़े पैमाने पर साबित नहीं हुए हैं। इंडस्ट्री और सरकार, दोनों ई2ओ के साथ हैं और क्वालिटी मानकों की गारंटी दे रहे हैं। बस सामान्य तरीके से गाड़ी में फ्यूल भरवाते रहें।

    जिनकी गाड़ियां ई2ओ के लिए नहीं बनी हैं, उन्हें ई1ओ या सामान्य पेट्रोल (ईओ) ही डलवाना चाहिए। असली सवाल यह है कि जैसे-जैसे ई2ओ का चलन बढ़ेगा, क्या पंपों पर ई1ओ और ईओ मिलते रहेंगे? सरकार और तेल कंपनियों को यह देखना होगा कि पुरानी गाड़ियों के मालिकों को सही फ्यूल ढूंढने में दिक्कत न आए। अभी इस मुद्दे पर पक्का डेटा नहीं है, इसलिए फिलहाल नजर बनाए रखना ही ठीक रहेगा।

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    तीर्थ
    Tirth Pandya is a Senior Correspondent with the CarDekho Group and an automotive media professional with over 6 years of experience covering cars, EVs, and the ever-evolving world of mobility. An Automobile Engineering graduate, he specialises in automotive news, feature writing, launch coverage, and experiential storytelling. His love for machines began long before his professional career, fuelled by an enduring fascination with cars and even aeroplanes. Since entering the industry in 2020, he has spent countless hours on the road, chasing stories that take him from bustling city streets to remote off-road trails, always searching for the next great automotive experience. He combines technical expertise with a genuine passion for driving and exploration to bring readers engaging, insightful, and human-centric stories that capture not just the machines but also the emotions, adventures, and people behind them.और देखें

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