क्या देश में चलनी चाहिए एचसीएनजी कारें? सरकार ने मांगे सुझाव
एचसीएनजी, सीएनजी का ही एक मिश्रण है। इसमें 18 प्रतिशत हाइड्रोजन होती है। ये मिश्रण हैवी ड्यूटी सीएनजी व्हीकल में इंजन को बहुत ही कम इस्तेमाल करते हुए काम में लिया जा सकता है।
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सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक ड्राफ्ट ऑर्डर जारी किया है जिसमें ऑटोमोबाइल फ्यूल के रूप में हाइड्रोजन युक्त सीएनजी (एचसीएनजी) को शामिल करने पर सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1979 में संशोधन भी होगा।
ऑटोमोबाइल जगत में समय की मांग को देखते हुए अब कई बदलावो की जरूरत है। पावर के कई अन्य स्रोत अभी खोजे जा रहे हैं तो वहीं कई अब इस्तेमाल में लिए जा रहे हैं। इनमें से सीएनजी काफी किफायती ऑप्शन बनकर सामने आया है जिसके लिए देश में अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार हो चुका है।
क्या होती है हाइड्रो सीएनजी
शुरूआती टेस्ट से पता चला है कि एचसीएनजी का उपयोग कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ), मीथेन और टोटल हाइड्रोकार्बन (टीएचसी) के उत्सर्जन को कम कर सकता है। ये फ्यूल की खपत के मामले में सीएनजी से भी कई गुना बेहतर है।
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एचसीएनजी का एक और फायदा यह है कि इसे आसानी से सीएनजी पाइपलाइनों और बस डिपो में शामिल किया जा सकता है। दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसका शुरूआती टेस्ट एचसीएनजी किट से लैस 50 बसों में होगा। दिल्ली को इसलिए चुना जा सकता है क्योंकि यहां सीएनजी बसों, पंपों और मौजूदा सीएनजी इंफ्रास्ट्रक्चर का एक बड़ा नेटवर्क पहले से ही मौजूद है।
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मंत्रालय द्वारा जारी किया गया ड्राफ्ट पब्लिक और स्टेकहोल्डर्स के लिए भी खुला है।
नोटिस जारी होने के 30 दिनों के भीतर ई-मेल या पोस्ट के द्वारा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के संयुक्त सचिव (एमवीएल) को कमेंट और राय भेजी जा सकती है। इस ड्राफ्ट के बारे में ज्यादा जानने के लिए यहां देखें। हाल ही में परिवहन मंत्रालय द्वारा हाइड्रोजन फ्यूल सेल पावर से चलने वाले व्हीकल्स को लेकर भी एक नोटिस जारी किया गया था।
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