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    इलेक्ट्रिक व्हीकल पर और पांच साल तक दी जानी चाहिए फेम सब्सिडीः फिक्की

    फेम-II के अपडेटेड वर्जन को 2019 में पेश किया गया था। हालांकि अब ये स्कीम मार्च 2024 में खत्म होने जा रही है, ऐसे में फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ​(फिक्की) ने एक सुझाव दिया है जिसमें कहा गया है कि भारत सरकार को अगले 5 सालों के लिए इस स्कीम को आगे बढ़ा देना चाहिए। 

    भानु
    भानु
    Published On दिसंबर 06, 2023 17:36 ist
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    published onDec 06, 2023 14:32 IST
    last updated onDec 06, 2023 17:36 IST
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    • अप्रैल 2019 में पेश की गई थी फेम-II  सब्सिडी जो मार्च 2024 तक रहेगी लागू
    • नई फेम-III स्कीम के तहत निजी इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदने वालों को भी शामिल किए जाने का दिया गया है सुझाव 
    • अभी भारतीय बाजार में केवल 5 प्रतिशत इलेक्ट्रिक व्हीकल्स ही हैं मौजूद
    • इस स्कीम में हाइब्रिड व्हीकल्स को भी शामिल किए जाने का दिया गया है सुझाव

    भारत में पिछले कुछ सालों से धीरे धीरे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की डिमांड बढ़ने लगी है जिसे देखते हुए अलग अलग ब्रांड्स ने कई मॉडल्स भी उतारे हैं। भारत सरकार ने भी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री बढ़ाने के लिए पूरे देश में फास्टर अडॉप्शन एंड मैन्यूफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (फेम) स्कीम शुरू की थी।

    फिक्की ने क्या दिया है सुझाव?

    फिक्की का कहना है कि इंसेटिव्स के बंद हो जाने से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के दाम 25 प्रतिशत तक बढ़ जाएंगे, ऐसे में फिर इच्छुक ग्राहक इन व्हीकल्स को खरीदने से कतराएंगे। संगठन के अनुसार अभी भारत में केवल 5 प्रतिशत इलेक्ट्रिक व्हीकल्स ही मौजूद हैं। 

    Electric cars

    यदि इंसेटिव स्कीम को अगले पांच सालों तक जारी रखा जाता है तो करीब 30.5 मिलियन इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की बिक्री हो सकती है और इससे भारत के ट्रांसपोर्ट में 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिफिकेशन का लक्ष्य भी पूरा हो सकता है। फिक्की का सुझाव है कि एक बार इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और पेट्रोल डीजल व्हीकल्स के बीच प्राइस गैप कम हो जाए तो सब्सिडी कम की जा सकती है और बंद भी ​की जा सकती है। ये चीज तभी पूरी हो सकती है जब तक बैटरी की कीमत नीचे ना आ जाए और अगले 3 से 5 सालों में ईवी कंपोनेंट्स की कीमतें भी कम ना हो जाए। 

    फिक्की के अन्य सुझाव

    फिक्की ने इस बात को लेकर कुछ और सुझाव भी दिए हैं जो इस प्रकार से है:

    फिक्की का कहना है कि फेम-III स्कीम के तहत स्ट्रॉन्ग और प्लग इन हाइब्रिड व्हीकल्स और हायड्रोजन पावर्ड व्हीकल्स को भी शामिल किया जाना चाहिए। 

    फेम-III स्कीम के फायदे इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदने वाले निजी ग्राहकों को भी दिए जाने चाहिए। 

    इसके अलावा ये भी कहा गया है कि सब्सिडी बैटरी के साइज के हिसाब से देनी चाहिए। 

    यह भी पढ़ें: साल के आखिर में कार खरीदने के क्या हैं फायदे और नुकसान, जानिए यहां

    फिक्सी ईवी कमेटी की चेयरपर्सन सुलज्जा फिरोदिया मोटवानी ने कहा कि “भारत सरकार की फेम-II स्कीम ने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की कीमतों को कम करने में अहम भूमिका निभाई है। इससे एक सकरात्मक असर तो हुआ ही है और देश में लोगों ने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स खरीदना शुरू कर दिया है। हमारी शुरूआत तो अच्छी रही, मगर अभी हमनें आधा रास्ता ही तय किया है। हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि अब भी बिना सब्सिडी के आईसीई मॉडल्स के मुकाबले ईवी की कीमतेंं 40 से 130 प्रतिशत ज्यादा है, ऐसे में ये बेहद जरूरी है कि सब्सिडी देकर इस प्राइस गैप को जितना कम किया जा सके उतना करें। फेम-III स्कीम से आने वाले सालों में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के प्रति ग्राहकों की रूचि बढ़ेगी।”


    फेम-II स्कीम पर डालिए एक नजर

    अप्रैल 2019 में फेम-II स्कीम को पेश किया गया था जो कि मार्च 2022 में ही बंद होने वाली थी, मगर कोविड-19 को देखते हुए सरकार ने इसे 31 मार्च 2024 तक बढ़ाने का ऐलान किया था। इसमें हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को शामिल किया गया था, मगर सबसे ज्यादा फायदा इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को दिया गया था। 

    Tata Tiago EV

    इस स्कीम के लिए 10,000 करोड़ रुपये का बजट पारित हुआ था, जिसके तहत इलेक्ट्रिक व्हीकल्स खरीदने वालों को सब्सिडी दी जा रही है। इस स्कीम में 55,000 करोड़ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, 10 लाख इलेक्ट्रिक 2 व्हीलर्स, 5 लाख 3 व्हीलर्स और 7000 बसों को सब्सिडी दी गई। 4 व्हीलर की बात करें तो इसमें कमर्शियल व्हीकल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के काम आने वाले व्हीकल्स को शामिल किया गया था। 

    फिक्की द्वारा ये सब सुझाव दिए गए हैं और अब देखने वाली बात ये होगी कि भारत सरकार इनमें से किस सुझाव को अमल में लाती है। इनमें से कौनसा सुझाव आपको आया पसंद? कमेंट बॉक्स में हमें जरूर बताएं।

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    भानु
    <p><span id="docs-internal-guid-d5dab83e-7fff-0272-69cc-807a7c6a46e9"><span>बनना तो क्रिकेटर चाहता था मगर, 5-साल तक अखबारों,न्यूज चैनल,न्यूज वेबसाइट के लिए फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क वर्क करते हुए आज ऑटोमोबाइल की दुनिया में ढेर सारी कारों और उनके कलर,फीचर्स,इंजन, पार्ट्स के बारे में लिखते हुए कारदेखो के साथ शानदार 2 साल पूरे कर चुका हूं। प्रवृति घुमक्कड़ किस्म की है और पूरा हिंदुस्तान ट्रेन में बैठकर देखने का सपना है। काम के अलावा फ्री टाइम में टेस्ट मैच देखना,क्रिकेट खेलना, गंभीर विषयों के बारे में जानना, सोचना और लिखना,डार्क,आर्ट,कॉमेडी सभी तरह की मूवीज़ देखने का शौक है। फेसबुक,ट्विटर,इंस्टाग्राम सभी जगह हायपर एक्टिव भी हूं। ज्यादातर वहां मीम्स ही शेयर करता हूं गंभीर बातें तो अपने तक ही सीमित है। इसके अलावा कुछ खास नहीं।</span></span></p>और देखें

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