दिवाली 2025 तक ज्यादा सस्ती हो सकती है कारें,केंद्र सरकार कम जीएसटी दरें लागू करने की बना रही योजना
इस संशोधित जीएसटी संरचना का उद्देश्य कर संरचना को सरल बनाना और वस्तुओं को अधिक किफायती बनाना है।
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2017 में, भारत सरकार ने देशभर में इनडायरेक्ट टैक्सेशन को सुव्यवस्थित बनाने के लिए गुड्स एवं सर्विस टैक्स (जीएसटी) शुरू किया था। अब, आठ वर्षों के बाद, केंद्र सरकार जीएसटी व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में की थी।
इसका सबसे बड़ा लाभ भारत में कार खरीदारों को मिल सकता है, क्योंकि सरकार छोटी कारों पर जीएसटी दरें कम करने और टैक्स के पूरे ढांचे को सरल बनाने पर विचार कर रही है।
प्रस्तावित जीएसटी सुधारों और वाहनों पर उनके प्रभाव के बारे में आपको जो कुछ भी जानना आवश्यक है, वह यहां दिया गया है।
असान जीएसटी स्ट्रक्चर किया गया है प्रस्तावित

सरकार मौजूदा 4-टियर जीएसटी स्लैब (5, 12, 18 और 28 प्रतिशत) से हटकर दो-टियर स्लैब स्ट्रक्चर की ओर बढ़ना चाहती है। आवश्यक वस्तुओं पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगेगा, जबकि कारों सहित अधिकांश अन्य वस्तुओं और सेवाओं पर 18 प्रतिशत की दर लागू होगी।
लग्जरी सामान और महंगी कारों, तंबाकू और शराब जैसी वस्तुओं पर अलग से 40 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य अनुपालन को आसान बनाना और विवादों को कम करना है।
8 प्रतिशत तक सस्ती हो सकती है छोटी कारें

वर्तमान में, 4 मीटर से कम लंबाई वाली 1.2 लीटर पेट्रोल और 1.5 लीटर डीजल इंजन क्षमता वाली कारों पर 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ-साथ सेस भी लगता है।
नए प्रस्ताव के तहत, जीएसटी की दर घटकर 18 प्रतिशत हो सकती है, जिससे कार खरीदारों को 5 से 8 प्रतिशत की बचत हो सकती है। उदाहरण के लिए, मारुति स्विफ्ट जैसी लोकप्रिय कार, जिसकी कीमत वर्तमान में लगभग 8 लाख रुपये (कई शहरों में ऑन-रोड) है, जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद लगभग 40,000 रुपये से 60,000 रुपये तक कम हो सकती है।
स्पेशल 40 प्रतिशत के ब्रेकेट में जाएगी बड़ी कारें

वर्तमान में, 4 मीटर से ज़्यादा लंबी और बड़े इंजन वाली कारों पर 28 प्रतिशत का सबसे ज़्यादा जीएसटी स्लैब लागू होता है, साथ ही भारी सेस भी लगता है, जिससे कुल कर भार लगभग 50 प्रतिशत हो जाता है। ये आमतौर पर कॉम्पैक्ट, मीडियम साइज और बड़े वाहन होते हैं, जैसे:
- कॉम्पैक्ट कार: 4 मीटर से ज्यादा लंबी होंडा सिटी जैसी सेडान या हुंडई क्रेटा और किआ सेल्टोस जैसी एसयूवी कारें।
- मिड साइज कार: टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस,महिंद्रा एक्सयूवी700,टाटा सफारी जैसे बड़े व्हीकल्स
- बड़ी कारें: टोयोटा फॉर्च्यूनर,स्कोडा कोडिएक और एमजी एम9 जैसी बड़ी कारें।
जीएसटी 2.0 के तहत, इन सभी को एक नए 40 प्रतिशत स्पेशल ब्रैकेट में ट्रांसफर किया जा सकता है, जो मौजूदा जीएसटी और सेस संयोजन की जगह लेगा। इससे खासकर कॉम्पैक्ट और मिड-साइज़ एसयूवी की कीमतों में भारी कमी नहीं आएगी।
इंश्योरेंस प्रीमियम में भी आ सकती है गिरावट

एक सूत्र ने यह भी बताया कि कारों के अलावा, सरकार स्वास्थ्य और जीवन बीमा सहित बीमा प्रीमियम पर जीएसटी को मौजूदा 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत या शून्य करने पर विचार कर रही है।
चूंकि सभी कारों के लिए मोटर बीमा अनिवार्य है, इस कदम से ओनरशिप की कुल लागत कम हो सकती है। उदाहरण के लिए, अगर जीएसटी को घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया जाए, तो 20,000 रुपये का एक सामान्य वार्षिक बीमा प्रीमियम लगभग 2,600 रुपये कम हो जाएगा।
कब होगा लागू?
ये प्रस्ताव फिलहाल जीएसटी परिषद के पास हैं, जिसके दिवाली 2025 से पहले अंतिम फैसला लेने की उम्मीद है। मंजूरी मिलने के बाद, संशोधित कर दरें जल्द ही लागू की जा सकती हैं।
आपके लिए इसके क्या मायने
अगर आप कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो समय इससे बेहतर नहीं हो सकता। छोटी कारें काफी सस्ती हो सकती हैं, जबकि बड़ी कारों पर भी कुछ राहत मिल सकती है। कम बीमा प्रीमियम से बचत और बढ़ जाएगी।
इसलिए, अगर जीएसटी 2.0 को परिषद उम्मीद के मुताबिक मंजूरी दे देती है, तो यह दिवाली नई कार घर लाने का सबसे अच्छा समय हो सकता है। इस सेगमेंट में कारों की बिक्री भी अच्छी खासी देखने को मिल सकती है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को और भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
जीएसटी 2.0 के लिए आप कितने हैं रोमांचित? कमेंट बॉक्स में हमें जरूर बताएं।














