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    देश में 2030 के बाद पेट्रोल-डीजल कारों की जगह ले सकती हैं इलेक्ट्रिक कारें

    -कुछ साल पहले सरकार ने भारत में 2030 के बाद केवल इलेक्ट्रिक कारें बेचने की अनुमति को लेकर आवाज़ उठाई थी।

    भानु
    भानु
    Published On जून 19, 2019 09:37 ist
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    published onJun 19, 2019 09:37 IST
    last updated onJun 19, 2019 09:37 IST
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    Hyundai Kona Electric

    भारत सरकार का थिंक टैंक माने जाने वाले नीति आयोग ने इलेक्ट्रिक व्हीकल कारों के भविष्य को लेकर एक प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि वर्ष 2030 के बाद देश में केवल इलेक्ट्रिक वाहन ही बेचे जा सकेंगे। यह प्रस्ताव मौजूदा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी द्वारा साल 2017 में रखा गया था।

    अब, ऑटोमोटिव उद्योग द्वारा पैरवी के बाद कहा जा रहा है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल के रोडमैप के बारे में निर्णय ऑटो उद्योग के साथ परामर्श के बाद लिया जाएगा।

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    देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का 60 प्रतिशत मार्केट शेयर रखने वाली मारुति सुजुकी और हुंडई अपने पोर्टफोलियो में जल्द ही इलेक्ट्रिक वाहन शामिल करने जा रही है। हुंडई अपनी पहली इलेक्ट्रिक एसयूवी कोना को भारतीय बाजार में उतारने जा रही है। भारत में इसे 9 जुलाई 2019 को लॉन्च किया जाएगा। पहली इलेक्ट्रिक एसयूवी कार होने के साथ यह देश की पहली सबसे लंबी रेंज वाली कार भी होगी। वहीं, मारुति साल 2020 तक अपनी इलेक्ट्रिक हैचबैक कार बाज़ार में पेश करेगी। ब्रिटिश कार निर्माता एमजी मोटर्स इस महीने के अंत तक अपनी पहली कार हेक्टर लॉन्च करेगी। इसके बाद कंपनी की इलेक्ट्रिक कार सेगमेंट में प्रवेश करने की योजना है। कंपनी दिसंबर 2019 तक अपनी लंबी रेंज वाली ईजेडएस कार को लॉन्च करेगी।

    टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियां भी भारतीय बाज़ार के लिए इलेक्ट्रिक कारें तैयार कर रही हैं। वहीं, हुंडई और किया मोटर्स की भी यहां भविष्य में इलेक्ट्रिक कारें मैन्यूफैक्चर करने की योजना है। ऐसे ही कुछ मास मार्केट कार निर्माता कंपनियां भी इलेक्ट्रिक व्हीकल पेश करने की इच्छा जता चुकी हैं। लेकिन केवल तब, जब सरकार के पास इलेक्ट्रिक कारों और उन्हें तैयार करने के लिए बुनियादी ढांचे का एक मजबूत रोडमैप हो।

    सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) भारत के सभी प्रमुख वाहन और वाहन इंजन निर्माताओं का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था है। अब यह देखने वाली बात होगी कि ये संस्था भारत में 2030 के बाद केवल इलेक्ट्रिक कारों को बेचे जाने के प्रस्ताव को हरी झंडी देती है कि नहीं। साथ ही अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि इतनी कम अवधि में सपोर्टिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर कैसे विकसित होगा।

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    भानु
    <p><span id="docs-internal-guid-d5dab83e-7fff-0272-69cc-807a7c6a46e9"><span>बनना तो क्रिकेटर चाहता था मगर, 5-साल तक अखबारों,न्यूज चैनल,न्यूज वेबसाइट के लिए फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क वर्क करते हुए आज ऑटोमोबाइल की दुनिया में ढेर सारी कारों और उनके कलर,फीचर्स,इंजन, पार्ट्स के बारे में लिखते हुए कारदेखो के साथ शानदार 2 साल पूरे कर चुका हूं। प्रवृति घुमक्कड़ किस्म की है और पूरा हिंदुस्तान ट्रेन में बैठकर देखने का सपना है। काम के अलावा फ्री टाइम में टेस्ट मैच देखना,क्रिकेट खेलना, गंभीर विषयों के बारे में जानना, सोचना और लिखना,डार्क,आर्ट,कॉमेडी सभी तरह की मूवीज़ देखने का शौक है। फेसबुक,ट्विटर,इंस्टाग्राम सभी जगह हायपर एक्टिव भी हूं। ज्यादातर वहां मीम्स ही शेयर करता हूं गंभीर बातें तो अपने तक ही सीमित है। इसके अलावा कुछ खास नहीं।</span></span></p>और देखें

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