महिंद्रा मिशन स्क्रीम इलेक्ट्रिक: 0-200-0 किलोमीटर प्रति घंटे रिकॉर्ड रन
एक इलेक्ट्रिक कार द्वारा सबसे तेज 0–200–0 किलोमीटर प्रति घंटे एक्सीलरेशन और ब्रेकिंग रन का प्रयास। क्या यह संभव है?
प्रकाशित: मार्च 27, 2026 11:40 am । cardekho
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ज्यादातर परफॉर्मेंस टेस्ट 0-100 किलोमीटर प्रति घंटे के समय और टॉप स्पीड के बारे में होते हैं। लेकिन 0-200-0 किलोमीटर प्रति घंटे का टेस्ट अलग है। यह सिर्फ एक्सीलरेशन के बारे में नहीं है। 200 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड तक जल्दी पहुंचना मायने रखता है, लेकिन इससे ज्यादा जो चीज मायने रखती है वो है इसके बाद क्या होगा। एयरोडायनामिक्स, तेज स्पीड पर स्टेबिलिटी, और सबसे जरूरी - ब्रेकिंग परफॉर्मेंस। कार के हर पार्ट्स को मिलकर काम करना होता है।
200 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड पर पहुंचने से यह पता चलता है कि कार कितनी काबिल है। और ब्रेक लगाकर वापस जीरो पर आना यह दिखाता है कि इसकी इंजीनियरिंग कितनी बेहतर है।
यह कोई रिकॉर्ड बनाने की कोशिश नहीं है
अगर आप इस तरह के ऑनलाइन टेस्ट खोजेंगे तो आपको ज्यादातर सुपरकार ही मिलेंगी। यहीं से चीजें दिलचस्प हो जाती है।
महिंद्रा बीई 6 के साथ हमने इस रिकॉर्ड को बनाने की कोशिश करने का फैसला किया, जो असल में एक फैमिली एसयूवी कार है। सिर्फ यह चीज इसे खास बनाती है। बीई6 इस टेस्ट को करने की कोशिश कर पाई और ऐसा कई बार किया, इससे पता चलता है कि इसकी काबिलियत और स्टेबिलिटी कैसी है।

जब यह टेस्ट पूरा हो गया तो एक चीज साफ हो गई। बीई6 ने इलेक्ट्रिक गाड़ी के तौर पर सबसे तेज 0-200-0 किलोमीटर प्रति घंटे का एक्सीलरेशन और ब्रेकिंग रिकॉर्ड बनाया, जिसे इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड ने सर्टिफाइड किया। इस तरह इसने इतिहास की किताबों में अपना नाम हमेशा के लिए दर्ज करवा लिया।
लेकिन यहां तक पहुंचना आसान नहीं था।
एक खास रिकॉर्ड के लिए सही जगह की जरूरत होती है
हमारे रेगुलर टेस्ट काफी सिंपल होते हैं। हम एक बंद सड़क का इस्तेमाल करते हैं, हमारे टाइमिंग के उपकरण लगाते हैं और एक-एक करके 0-100 किलोमीटर प्रति घंटे का एसेलरेशन और ब्रेकिंग टेस्ट करते हैं। यह टेस्ट पूर तरह से अलग था। 200 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड तक पहुंचने के लिए काफी जगह की जरूरत होती है। पब्लिक रोड इसके लिए सही ऑप्शन नहीं है। इसलिए हमें प्रोपर टेस्ट फैसिलिटी की जरूरत थी।

इसके लिए महिंद्रा का एसयूवी प्रूविंग ट्रैक काम आया। इसमें लंबी सीधी सड़क और पैराबोलिक ब्रेकिंग के साथ एक हाई स्पीड ट्रेक है। यह सेटअप कार को सुरक्षित तरीके से और एक कंट्रोल्ड माहौल में हाई स्पीड तक पहुंचने में मदद करता है।
दूसरा फायदा ये था कि महिंद्रा के खुद के इंजीनियर और टेक्नीशियन मौके पर मौजूद थे। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि बीई 6 टेस्ट के लिए सही कंडिशन में है।
और हां, ये एक स्टैंडर्ड प्रोडक्शन कार थी। कोई स्पेशल ट्यूनिंग नहीं। कोई बदलाव नहीं। केवल बाजार में बिकने वाली बीई 6 थी।
एक फैमिली एसयूवी?
चलिए अब इस कार के बारे में ही बात करते हैं। बीई 6 पहली ही नजर में सबसे अलग नजर आती है। इसका डिजाइन बोल्ड और शार्प है। यह कुछ ऐसी दिखती है, जैसी आप किसी कॉन्सेप्ट कार या सुपरकार से उम्मीद करते हैं।
यह एक इलेक्ट्रिक एसयूवी कार है, जो सभी के लिए उपलब्ध है। इसे महिंद्रा के नए इलेक्ट्रिक प्लेटफॉर्म पर डिजाइन किया गया है। इसमें नई टेक्नोलॉजी और परफॉर्मेंस के प्रति अलग अप्रोच है।
इस तरह की कोई भी चीज बनाने के लिए कॉन्फिडेंस चाहिए। और उसे पूरा करने के लिए साहस भी चाहिए, और यह रिकॉर्ड इस बात का सबूत है कि बीई 6 केवल दिखावे या दावों तक सीमित नहीं है। यह असल में बेहतरीन परफॉर्मेंस देने में सक्षम है।
तैयारी सिंपल लेकिन बेहद जरूरी
आप उम्मीद करेंगे कि इस तरह के रिकॉर्ड बनाने के लिए कार में बहुत सारे बदलाव करने होंगे। लेकिन ऐसा नहीं था।

चूंकि यह प्रोडक्शन बीई6 थी, ऐसे में तैयारी सिंपल थी। केवल टायर का प्रेशर चेक किया।
यह सुनिश्चित किया कि बैटरी पूरी चार्ज हो, और हमने केवल इतना ही किया।

इसके अलावा कुछ अन्य चीजों का ध्यान रखना भी जरूरी था। हमने इस रिकॉर्ड के लए टाइमिंग उपकरण और जीपीएस डेटा लॉगिंग टूल लगाए। कार के अंदर और बाहर कैमरा लगाए गए।

हमें महिंद्रा की इंजीनियरिंग टीम से भी काफी अहम सुझाव मिले। वे ट्रैक को बहुत अच्छी तरह से जानते थे और उन्होंने हमें गाइड किया कि बेंकिंग का इस्तेमाल कैसे करना है और कहां पर कार को तेज चलाना है।

कार को दौड़ाने की प्लानिंग करना बहुत जरूरी था। हमें यह तय करना था कि शुरू कहां से करें। हमें यह सुनिश्चित करना था कि कार सीधे रास्ते पर 200 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड पर पहुंच जाए, ताकि ब्रेक सुरक्षित तरीके से लगाए जा सके। कई बार प्रैक्टिस करने के बाद हमें सही जगह मिल गई।
प्लान बहुत सिंपल था। सीधे रास्ते पर कार के एसेलरेटर को जोर से दबाना था। करीब 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बैंकिंग में घुसना था। बैंकिंग में भी कार को लगातार तेज करते रखना था। आगे सीधे रास्ते पर 200 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड पर पहुंचना था। फिर जितनी जोर से हो सके, ब्रेक लगाने थे। जब सब कुछ तैयार हो गया, तो अब बारी थी।
रिकॉर्ड रन
बीई6 स्टार्ट लाइन पर खड़ी हो गई। जिन चीजों को चेक करना था, उन सब को चेक कर लिया गया। ट्रैक साफ था। टाइमिंग उपकरण तैयार थे।
तीन। दो। एक। चलो।
बीई6 ने तेजी से रफ्तार पकड़ी। जल्द ही हम सीधे रास्ते पर ड्राइव करते हुए 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पार कर गए। इसके बाद बैंकिंग आई।

किसी भी कार में 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बैंकिंग में एंटर करना बहुत तेज होता है। लेकिन यहां हमें एसेलरेट करते रहना था। बैंकिंग को इस स्पीड पर स्थिर रहने के लिए डिजाइन किया गया था। लेकिन जैसे-जैसे रफ्तार बढ़ती है, आपको सही लाइन में रहने के लिए स्टीयरिंग को थोड़ा एडजस्ट करना पड़ता है। इसके लिए पूरा ध्यान लगाना पड़ता है।
बैंकिंग से बाहर आते ही, कार सीधे रास्ते पर आ जाती है। फिर रफ्तार लगातार बढ़ती गई - 195... 198... 200 किलोमीटर प्रति घंटे।
टाइमिंग इक्विपमेंट ने एक जोरदार बीप के साथ असली जीपीएस रफ्तार की पुष्टि की और और फिर ब्रेक लगाने का समय आ गया।
ब्रेकिंग टेस्ट
200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ब्रेक लगाना काफी सीरियस है। ड्राइवर ने जोर से ब्रेक लगाए। बीई6 स्थिर रही। ब्रेकिंग मजबूत थी और कंट्रोल्ड थी। एबीएस और स्टेबिलिटी सिस्टम बैकग्राउंड में सुचारू रूप से काम कर रहे थे।

कोई ड्रामा नहीं। कंट्रोल नहीं खोया। बस एक साफ-सुथरा स्टॉप।
200 किलोमीटर प्रति घंटे से जीरो तक पहुंचने में कार को 6.31 सेकंड लगे। इतनी तेज रफ्तार पर इस तरह की ब्रेकिंग बहुत कम देखने को मिलती है। यहां तक कि रेस ट्रैक पर भी कारें आमतौर पर मोड़ने लायक रफ्तार तक धीमी हो जाती हैं और चलती रहती हैं।
यहां कार पूरी तरह से रूक गई।
फाइनल नंबर
टेस्ट रन के बाद हमने डेटा चेक किया। हमें ये नतीजे मिले:
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0-100 किलोमीटर प्रति घंटे: 7.24 सेकंड
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0-200 किलोमीटर प्रति घंटे: 34.06 सेकंड
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200-0 किलोमीटर प्रति घंटे- 6.31 सेकंड
पूरे रन में कुल समय लगा: 41.67 सेकंड, कुल दूरी तय की: 1,573.75 मीटर
ये नंबर इसकी पुष्टि करते हैं। महिंद्रा बीई6 के नाम अब इलेक्ट्रिक गाड़ी द्वारा 0-200-0 किलोमीटर प्रति घंटे की सबसे तेज एक्सीलरेशन और ब्रेकिंग रन का रिकॉर्ड है, जिसे इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने सर्टिफाइड किया है।
इसका क्या मतलब है
यह रिकॉर्ड सिर्फ स्पीड के बारे में नहीं है। यह दिखाता है कि एक मॉडर्न इलेक्ट्रिक एसयूवी कार पूरी क्षमता से चलाई जाए तो क्या कर सकती है। इस टेस्ट से पता चलता है कि एक्सीलरेशन, स्टेबिलिटी और ब्रेकिंग सब मिलकर एक साथ काम कर सकते हैं।

बीई6 ने यह साबित किया है कि इलेक्ट्रिक गाड़ी केवल एफिशिएंसी के लिए नहीं हैं। ये तेज हो सकती हैं। ये स्टेबल हो सकती हैं। और ये पूरे कॉन्फिडेंस से रूक सकती हैं।
क्योंकि असली परफॉर्मेंस सिर्फ तेज चलने के बारे में नहीं है। यह हर पल कंट्रोल में रहने के बारे में है और यह रन ठीक यही साबित करता है।